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माइक्रोसॉफ्ट के बगैर क्या करेंगे बिल गेट्स

नई दिल्ली. आईटी क्रांति को दुनिया के आर-पार पहुंचाने वाली कंपनी माइक्रोसॉफ्ट की स्थापना करने वाले बिल गेट्स अपने स्वप्नराज्य (यूटोपिया) को छोड़कर एक नई जिंदगी की शुरूआत कर रहे हैं। वह मलेरिया को खत्म करना चाहते हैं।

करीब 50 अरब डॉलर की दौलत वाले इस इंसान को आप लालची भी नहीं कह सकते कि वह यह सब दौलत हासिल करने के लिए कर रहा है। दुनिया के 90 फीसदी डेस्कटॉप माइक्रोसाफ्ट विंडोज पर चलते हैं।

हार्वर्ड के इस ड्राप आउट ने 1975 में माइक्रोसॉफ्ट शुरू की थी। उस समय 30 वर्षीय साथी पाल एलन भी बिल से दो साल बड़ा था। केवल तीन साल में बिल और एलन ने अपने पहले मिलियन डॉलर कमा लिए थे।

विश्वस्तरीय जिज्ञासा
गेट्स के दोस्त हैरान होते हैं कि बिल आखिर नई आजादी का लाभ कैसे लेंगे। वॉरेन बफेट की टिप्पणी है कि उन्हें (गेट्स) पता नहीं कि उनका दिमाग कहां लगेगा। यह देखना मेरे लिए रोचक होगा। एक अन्य दोस्त कहते हैं कि बिल हमेशा जबर्दस्त व्यावसायिक दिमाग के रहे हैं और इसे अचानक बंद नहीं कर सकते।

क्या करेंगे गेट्स
बिल के तीन दफ्तर होंगे: एक रेडमंड में माइक्रोसॉफ्ट, दूसरा सिएटल में फाउंडेशन और तीसरा घर के पास। वह एक दिन रेडमंड में बिताएंगे, दो फाउंडेशन में और दो व्यक्तिगत दफ्तर में। तीनों भूमिकाएं एक दूसरे पर सवार दिखाई देंगी।

सबसे बड़ा अंतर यही होगा कि माइक्रोसॉफ्ट में उनका कार्यभार काफी घट जाएगा। वह इंटरनेट सर्च टेक्नोलॉजीस पर सलाह देते रहेंगे, बोर्ड मीटिंग में हिस्सा लेंगे और कभी कभार किसी को पुरस्कार देने कंपनी में आया करेंगे। जनता में ज्यादा दिखाई देंगे।





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