जोधपुर. राजस्थान आयुर्वेद यूनिवर्सिटी में हर्बल फार्मिंग के विद्यार्थियों को पश्चिमी राजस्थान में उत्पन्न होने वाले सभी वनस्पतियों की जानकारी के साथ उन्हें विकसित करने की विभिन्न प्रणालियों से भी अवगत करवाया जाएगा।
यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. बीएल गौड़ तथा वित्तीय परिषद की ओर से गठित नवीन पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए गठित दो कमेटियों की बैठक शनिवार को करवड़ स्थित प्रशासनिक कार्यालय में आयोजित हुई। यह बैठक कुलपति प्रो. गौड़ की अध्यक्षता में हुई।
कमेटियों की ओर से तैयार पाठ्यक्रम का प्रारूप कुलपति के समक्ष प्रस्तुत किया गया। कुलपति ने पाठ्यक्रमों में कुछ संशोधन करने के आदेश दिए हैं। शीघ्र ही संशोधित पाठ्यक्रम कुलपति के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। पाठ्यक्रम पर मोहर लगने के बाद इसी शैक्षणिक सत्र से यूनिवर्सिटी में हर्बल फर्ा्िमग व पंचकर्म से जुड़े दो प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम शुरू होंगे।
कमेटियों की इन बैठकों में राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, जयपुर के निदेशक प्रो. महेशचंद्र शर्मा, राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के प्रो. राधेश्याम शर्मा, पंचकर्म विभागाध्यक्ष के गोवर्धन, आंगिक आयुर्वेद महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. प्रेमचंद शर्मा, कृषि पौध संरक्षण विभाग के सहायक निदेशक डीके द्विवेदी व डॉ. अरुण त्यागी मौजूद थे।
हर्बल पार्क में होगा प्रायोगिक
यूनिवर्सिटी की ओर से विकसित किए जाने वाले हर्बल पार्क में हर्बल फार्मिंग डिप्लोमा कोर्स के प्रायोगिक करवाए जाएंगे। ग्रीन हाउस की विधियों व राज्य में उत्पन्न होने वाली वनस्पितयों की जानकारी भी दी जाएगी। एक वर्ष के इस पाठयक्रम में कुलपति द्वारा शीघ्र ही सीटें निर्धारित की जाएंगी।
पंचकर्म सहायक व टेक्नीशियन पाठयक्रम में पंचकर्म के विभिन्न कार्र्यो में चिकित्सक के साथ सहायक के रूप में कार्य करने की ट्रेनिंग दी जाएगी। इस पाठयक्रम में मसाज, अभ्यंग, वामन कर्म, द्रव्य तैयार करने तथा अन्य कार्र्यो की विधियां सिखाई जाएंगी। यह पाठ्यक्रम भी एक वर्ष का होगा।