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जेडीए की चिट्ठी से यूआईटी में हलचत

जोधपुर. letter जोधपुर विकास प्राधिकरण के गठन को लेकर आए एक पत्र से नगर विकास न्यास में हलचल मच गई है। राज्य सरकार ने शुक्रवार को जेडीए गठन को लेकर नगर विकास न्यास से मूल प्रस्ताव सहित अतिरिक्त पदों पर होने वाले संभावित व्यय का ब्यौरा मांगा है। पिछले तीन-चार महीनों से सरकार से जेडीए को लेकर कोई पूछ-परख नहीं हो रही थी।

न्यास के बोर्ड को आस थी कि कुछ महीने और निकल जाएंगे। अब विधेयक मंजूरी के लिए तैयार होने और प्रशासनिक हलचल तेज होने से न्यास बोर्ड की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। नगरीय विकास विभाग ने न्यास सचिव को जेडीए के गठन से जुड़ी बुनियादी जानकारियां भिजवाने को कहा है। फैक्स से मिले इस पत्र के बाद न्यास ने जवाब भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। फिलाल जेडीए गठन की फाइल मुख्यमंत्री के पास लंबित है। विधेयक का प्रारूप विधि विभाग से आ चुका है, जिसे अब केबिनेट की मंजूरी के बाद विधानसभा में रखा जाना है।

सब कुछ ठीक रहा तो विधानसभा के मानसून सत्र में इस विधेयक को रखा जा सकता है। यदि ऐसा नहीं हुआ तो सरकार के पास जेडीए बनाने के लिए अध्यादेश जारी करने के अलावा कोई चारा नहीं रहेगा।

230 गांवों को शामिल करने का प्रस्ताव : जेडीए का गठन होने की स्थिति में इसके क्षेत्राधिकार को लेकर अब तक कोई नीतिगत निर्णय नहीं हुआ है, लेकिन नगर विकास न्यास की ओर से भेजे गए प्रस्ताव में 230 गांवों को शामिल किया गया है। न्यास के क्षेत्राधिकार में इस समय 72 राजस्व गांव हैं। नए प्रस्ताव में शामिल 230 गांवों का क्षेत्रफल करीब 3 हजार 832.12 वर्ग किमी है।





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