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पधारो गुरु ग्रंथ साहेब

उदयपुर. granth गुरता गद्दी के 300 साल मनाने के उपलक्ष्य में सिख गुरुओं की शिक्षाओं को प्रचारित करने के लिए स्वाधीन भारत में पहली बार निकली गुरु मानियो ग्रंथ-जागृति यात्रा चित्तौड़गढ़ से रविवार की शाम उदयपुर पहुंचेगी।

गुरु गोविंदसिंहजी द्वारा हस्तलिखित बीड़ (प्रति) और शस्त्रों को लेकर पहुंच रही यात्रा का रविवार शाम साढ़े 5 बजे नगर प्रवेश होगा। यात्रा की अगवानी में सिक्ख समाज द्वारा शहर के पांचों गुरुद्वारों को आकर्षक रोशनी से नहलाया गया है।

सिक्ख घरों में लोग दीप मालाओं से अपनी खुशी व उत्साह जाहिर करेंगे। यात्रा में साथ हैड ग्रंथी प्रतापसिंह सहित 50 सदस्यीय दल व अन्य गुरुद्वारों के प्रमुख भी पहुंच रहे है। उनकी अगवानी करने रविवार दोपहर सिक्ख कॉलोनी, सेक्टर 11, सेक्टर 14 और प्रतापनगर क्षेत्र से युवा और बुजुर्ग समाजजन करीब 50 वाहनों का काफिला लेकर चित्तौड़गढ़ जाएंगे। इनका दूसरा दल मंगलवाड़ में अगवानी करते हुए डबोक लेकर पहुंचेगा। यात्रा की अगवानी समाजजन श्वेत वस्त्र में करेंगे। यात्रा में श्वेत वस्त्र पहने पुरुष नीली पगड़ी और महिलाएं गले में नीली चुन्नी पहने होगी।

दो दिन रूकेगी यात्रा, दर्शन होंगे : रविवार को पहुंच रही यात्रा दो रात उदयपुर प्रवास करेगी। पहले दिन सिक्ख कॉलोनी स्थित सचखंड दरबार में और अगले दिन सेक्टर 11 स्थित गुरु अजरुन दरबार में प्रवास रहेगा। इस दौरान गुरुगोविंद सिंह और उनके समकालीन शहीदों के अस्त्र-शस्त्रों के साथ गुरु ग्रंथ साहिब की पुरातन हस्तलिखित बीड़ के दर्शन लाभ होंगे। सेक्टर 11 स्थित गुरु अजरुन दरबार में 1 जुलाई को सुबह 6 से 9 बजे तक ज्ञानी चिमनजीतसिंह और ओंकारसिंह अमृतसर वाले शबद-कीर्तन करेंगे।

मंगलवाड़ में होगी अगवानी : रविवार दोपहर में 50 वाहनों का जत्था चित्तौड़ रवाना होगा। समाजजन मंगलवाड़ में अगवानी करते हुए यात्रा को नगर में लाएंगे। इससे पहले डबोक में रेमन मार्ट पर स्वागत किया जाएगा। प्रतापनगर में शिव मंदिर पहुंचने पर सिक्ख व सिंधी समाज द्वारा आतिशबाजी व पुष्प वर्षा कर स्वागत किया जाएगा। कुम्हारों का भट्टा स्थित सिक्ख कॉलोनी में गलीचा बिछाया जाएगा जो गुलाब की पत्तियों से सजी होगी। इस गलीचे से होकर बीड़ और शस्त्रों को गुरुद्वारे तक ले जाएंगे।

शहर में निकलेगी शोभायात्रा : सोमवार को यात्रा दुर्गानर्सरी रोड होते हुए शक्तिनगर पहुंचेगी जहां सिंधी समाज स्वागत करेगा। शास्त्री सर्कल गुरुद्वारा के बाहर आरएसएस कार्यकर्ता मार्च पास्ट करेंगे और सलामी देंगे। यात्रा का जवाहरनगर, पटेल सर्कल पर सिंधी समाज द्वारा स्वागत किया जाएगा। रात्रि में सेक्टर 4 स्थित गुरुनानक पब्लिक स्कूल में चिमनजीतसिंह और ओंकारसिंह के कीर्तन होंगे। सिंधुधाम, जवाहरनगर के मुख्यद्वार पर सोमवार दोपहर 1 बजे जवाहरनगर पूज्य सिंधी पंचायत, युवा सेवा समिति, झूलेलाल मंदिर मंडली द्वारा भव्य स्वागत किया जाएगा।

सेक्टर 14 में होगी विदाई : मंगलवार सुबह अहमदाबाद से अगवानी करने श्रद्धालु पहुचेंगे। सेक्टर 11 स्थित गुरुद्वारा में सुबह 6 से 9 बजे तक होगा शबद कीर्तन होंगे। चिमनजीतसिंह और ओंकारसिंह के शबद-कीर्तन के बाद यात्रा को अगले पड़ाव के लिए विदाई दी जाएगी। विदाई लेकर यात्रा सेक्टर 14 स्थित गुरुद्वारे पहुंचेगी।

300 साल गुरु दे नाल : सिख धर्म के प्रवर्तक गुरु नानक देव की परंपरा में दस गुरुओं ने इस धर्म रूपी पौधे को सींचा। दसवें गुरु गोविंदसिंह ने इसी भक्ति पंथ को जुल्म के विरूद्ध खड़ा कर शक्तिपंथ के रूप में खालसा पंथ का स्वरूप दिया। भक्ति पंथ के ग्रंथ जिसे गुरु अर्जनदेव ने ‘पोथी परमेसर का थान’ उच्चरित कर सम्मान दिया, को गुरु गोविंदसिंह ने सिखों के जुगोंजुग अटल गुरु के रूप में ‘श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी’ की गुरु गद्दी पर विराजित किया और सिखों को इन्हें गुरु मानने का हुक्म दिया। गुरु गद्दी का 300वां साल इस साल धूम धाम व श्रद्धा से मनाया जा रहा है।

सर्वधर्म सांझीवालता का प्रतीक है गुरु ग्रंथ साहिब : गुरु ग्रंथ साहिब में जहां सिख मत के छह गुरु साहिबों की वाणी संकलित है, वहीं तीस हिन्दू भक्तों, मुस्लिम पीर व भट्टों की वाणी भी समाहित है जो सर्वधर्म सांझीवाला का प्रतीक है। भक्त कबीरदास, पीपा जी, संत रविदास, भक्त धन्नाजी, शेखफरीद आदि की वाणी भी गुरु रूप में दर्ज है। गुरु मानियो ग्रंथ जागृति यात्रा महाराष्ट्र के नांदेड़ से रवाना हुई है जो जम्मू, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, गुजरात होते हुए अक्टूबर में नांदेड़ पहुंचेगी।





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