उदयपुर. देलवाड़ा मंदिरों के प्रबंधन को लेकर श्वेताम्बर जैन महासभा, उदयपुर और देलवाड़ा जैन सोसायटी के बीच चल रहे विवाद को सुलझाने के प्रयास शुरू हो गए हैं।
दोनों पक्षों का मानना है कि मंदिरों की भव्यता और ख्याति के लिए समन्वित प्रयास किए जाएं। इसे लेकर शनिवार को महासभा के अध्यक्ष किरणमल सावनसुखा और सोसायटी के मार्गदर्शक हीरालाल कटारिया के बीच वार्ता हुई। कटारिया शनिवार को न्यू फतहपुरा स्थित सावनसुखा के घर गए। वहां पुरानी दोस्ती की दुहाई देते हुए कहा कि अनशन से कटुता बढ़ेगी और सामाजिक एकता प्रभावित होगी।
उन्होंने कहा कि देलवाड़ा के जिनालयों के जीर्णोद्धार का कार्य चल रहा है। अब तक कार्य जिस स्तर पर पहुंचा है, उसमें जैन महासभा की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।
मंदिर के कार्य को पूर्ण कराने के दायित्व से जैन महासभा बच नहीं सकती। महासभा और सोसायटी का एक लक्ष्य होना चाहिए। दोनों संगठन ही जैन धर्म से जुड़े हैं। विवाद समाप्त करने के लिए महासभा को पहल करनी होगी। उन्होंने कहा कि आचार्य सोमसुंदर सूरीश्वर द्वारा गठित जीर्णोद्धार कमेटी में महासभा के 12 सदस्य हैं। इसके संयोजक गंभीरसिंह मेहता हैं। जो जैन महासभा के हैं। इसके पूर्ण होने से जैन समाज के गौरव एवं प्रतिष्ठा में अभिवृद्धि होगी।
सोसायटी का महासभा से आग्रह
>> श्वेताम्बर जैन महासभा अध्यक्ष किरणमल सावनसुखा अनशन का निर्णय वापस लें।
>> दोनों समाज के मध्य कटुता को समाप्त करने में पहल करें।
>> गृहमंत्री के खिलाफ निंदा प्रस्ताव एवं बहिष्कार का निर्णय वापस लिया जाए।
>> गृहमंत्री की मध्यस्थ की भूमिका में मंदिर विवाद का सम्मानजनक समाधान निकाला जाए।
>> आचार्य सोमसुंदर सूरीश्वर की निश्रा में मंदिर विकास के कार्य को आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
मंदिर विवाद का समझौते से निकाले जाने वाले हल के लिए सावनसुखाजी का रूख सकारात्मक था। उन्होंने भी समाज की एकता को सर्वोपरि मान सही निर्णय का आश्वासन दिया।
—हीरालाल कटारिया, मार्गदर्शक, देलवाड़ा जैन सोसायटी
देलवाड़ा जैन सोसायटी के मार्गदर्शक हीरालाल कटारिया से बातचीत हुई है। समाज पदाधिकारियों से चर्चा के बाद शीघ्र हल निकाला जाएगा। रविवार को उदयपुर में गृहमंत्री से भी चर्चा की जाएगी।
—किरणमल सावनसुखा, अध्यक्ष, श्वेताम्बर जैन महासभा, उदयपुर