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सेहत के लिए निवेश

बारिश का मौसम आते ही गुप्ता दंपती ने पानी उबालकर पीना शुरू कर दिया है। इसी प्रकार शर्माजी के परिवार ने तरल क्लोरीन का इस्तेमाल करना प्रारंभ किया है। क्या ये दोनों तरीके पानी को पूरी तरह से शुद्ध कर सकते हैं? नहीं। पहले तरीके में बैक्टीरिया तो नष्ट हो जाएंगे, लेकिन साथ ही कई ऐसे महत्वपूर्ण खनिज पदार्थ भी खत्म हो जाएंगे जो हमारे शरीर के लिए बेहद जरूरी होते हैं। दूसरे तरीके में न तो सभी बैक्टीरिया समाप्त हो पाएंगे और न ही पानी का स्वाद सही रह पाएगा।

पानी को पूर्णरूपेण शुद्ध और बैक्टीरिया व कठोरता (फ्लोराइड, कैल्शियम, आयरन इत्यादि की अधिकता) रहित बनाने का एक वैज्ञानिक उपाय है वाटर प्यूरीफायर। बाजार में कई कंपनियों के वॉटर प्यूरीफायर उपलब्ध हैं। प्यूरीफायर किस कंपनी का लिया जाए, यह तय करने से ज्यादा जरूरी यह है कि किस तकनीक पर आधारित प्यूरीफायर आपके लिए उपयोगी है। इसका निर्धारण आपके यहां सप्लाई हो रहे पानी की गुणवत्ता के आधार पर किया जाना चाहिए।

कैसे करें चयन?

बैक्टीरिया रहित वाटर आउटपुट देने वाले प्यूरीफायर यू.वी.(अल्ट्रा वायलेट) तकनीक आधारित होते हैं। इसमें बैक्टीरिया नष्ट होने के साथ-साथ पानी की बदबू, कसैला स्वाद, रंग, रासायनिक दुष्प्रभाव इत्यादि जैसे तमाम अवांछित तत्व दूर हो जाते हैं और पानी पूरी तरह स्वच्छ हो जाता है। लेकिन पानी की कठोरता इससे दूर नहीं हो पाती। इस कठोरता के लिए वैज्ञानिक भाषा में टीडीएस (टोटल डिजाल्व सालिड) शब्द का इस्तेमाल किया जाता है। मानव स्वास्थ्य के लिए पानी में टीडीएस की मात्रा प्रति लीटर 500 मिली ग्राम से अधिक अच्छी नहीं मानी जाती। अगर पानी में टीडीएस 500 से कम है तो यू.वी. आधारित वाटर प्यूरीफायर लगाया जा सकता है, लेकिन अगर इसका स्तर 500 से अधिक है तो आर.ओ. (रिवर्स ओस्मोजिस) तकनीक आधारित प्यूरीफायर लगाया जाना चाहिए। यह प्यूरीफायर बैक्टीरिया इत्यादि गंदगी को साफ करने के साथ ही पानी की कठोरता भी दूर कर देता है।

तकनीक का पेंच भी: संजय अग्रवाल पहले जिस इलाके में रहते थे, वहां पानी की कठोरता अधिक थी। इसलिए उन्होंने आर.ओ. तकनीक आधारित वॉटर प्यूरीफायर लगाया। अब उन्होंने जहां नया मकान लिया है, वहां पानी की कठोरता बेहद कम है। इसलिए अब वे उसी वॉटर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करते हैं तो वह पानी के टीडीएस को कम करने के साथ ऐसे खनिज पदार्थो को भी पानी में से निकाल देगा जो शरीर के लिए महत्वपूर्ण है। कुछ लोगों के साथ इसका उलटा भी हो सकता है। कम टीडीएस के मद्देनजर अगर किसी व्यक्ति ने पहले यू.वी. आधारित प्यूरीफायर लगाया हो और अब ऐसे इलाके में पहुंच गए हो जहां के पानी में टीडीएस अधिक हो तो यूवी आधारित प्यूरीफायर की उपयोगिता कम हो जाएगी। इसी को ध्यान में रखते हुए अब कंपनियां ऐसे उत्पाद भी बना रही हैं जो दोनों परिस्थितियों में काम आ सके।

यह ध्यान रखें

प्यूरीफायर का चयर पानी की गुणवत्ता के अनुरूप करें।

पानी की गुणवत्ता का टेस्ट लैब में भी करवा लें।

टीडीएस की मात्रा बोरवेल के पानी में अपेक्षाकृत अधिक और झील, नदी के पानी में कम होती है।

फाइनेंस स्कीमों में शून्य फीसदी के पीछे छिपी शर्तो को जांच लें।

बाजार में उपलब्ध प्रमुख मॉडल

एक्वागार्ड क्लासिक (यूवी आधारित)

कीमत - 7,190 रु.

स्मार्ट (आरओ आधारित)

कीमत - 9,150 रु.

टोटल आरओ (आरओ आधारित)

कीमत - 14,500 रु.

टोटल सेंसा (दोनों तकनीकों का मिश्रण)

कीमत - 17,900 रु.

केंट अल्ट्रा (यूवी आधारित)

कीमत - 7,950 रु.

केंट ग्रांड (दोनों तकनीकों का मिश्रण)

कीमत - 15,490 रु.

ऊषा-ब्रिटा डिजीटल (यूवी आधारित)

कीमत- 8,999 रु.

वाटरगार्ड फोंटाना (आरओ आधारित)

कीमत- 14,999 रु.

ल्यूमिनस ज्वैल (आरओ आधारित)

कीमत - 14,900 रु.

यूनिलीवर प्योर इट (ऑफलाइन)

कीमत - 1,800 रु.





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