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एक कहावत है, ‘नो गेन विदआउट पेन’। इसलिए अगर आपको यूरो कप-2008 का मजा उठाना है तो देर रात तक जागना ही पड़ेगा। पिछले कुछ सप्ताह से फुटबॉल की खुमारी आधी रात से शुरू होकर लोगों पर सुबह तक जस की तस रह रही है।
बस एक शिकायत है जो मुझे सुनने को मिली है वो है कि जर्मनी और टर्की के बीच हुए मैच खत्म होने से पहले ही कई लोगों की आंख लग गई, लेकिन यह भी सत्य है कि पूरे विश्व में फुटबॉल देखने वालों को इस मैच ने जैसे जकड़ लिया था। जैसा की अब सब जानते हैं कि इस मैच में टर्की को जर्मनी से 3-2 की शिकस्त झेलनी पड़ी थी, लेकिन पूरे टूर्नामेंट में टर्की की यंग ब्रिगेड ने सबको चौंकाने वाले खेल का प्रदर्शन किया। कई मैचों में भाग्य ने टर्की का साथ दिया और वे बिल्कुल आखिरी में आकर जीते।
पर जब सेमीफाइनल का मैच एकस्ट्रा टाइम में पहुंचा तो भाग्य पलटी मारकर जर्मनी के पाले में पहुंचा गया और टर्की को हार झेलनी पड़ी। अब यूरो कप का क्लाइमेक्स रविवार को होगा जब सख्त जर्मनी का सामना अभी तक यूरो कप में एक भी मैच न हारने वाले स्पेन से होगा। जिस तरीके से स्पेन ने दूसरे सेमीफाइनल में रूस को कुचला, इससे लगता है कि उन्होंने रूस से तेल के दाम बढ़ाने का बदला लिया हो! अब फाइनल की घड़ी आ गई है।
टूर्नामेंट की बेस्ट टीम मानी जा रहीं पुर्तगाल, फ्रांस और इटली की टीमें बाहर हो चुकी हैं। इसमें कोई अंचभे की बात इसलिए नहीं है क्योंकि हम 1983 के क्रिकेट वल्र्डकप में उलटफेर से अच्छी तरह से वाकिफ हैं। दो बेस्ट टीमों को यूरो कप के फाइनल तक पहुंचना ही था और ऐसा हुआ भी है। अब रविवार की रात का इंतजार करिए और सोमवार की सुबह (12 बजकर 15 मिनट पर) उठकर किसी टीम को विजेता बनते देखिए। और एक बार फिर याद रखिए कि बिना किसी बलिदान के आपको खुशियां नहीं मिलेंगी।