अजमेर.
नगर परिषद शहर के चार प्रमुख स्थानों पर कीमती जमीन के बीओटी आधार पर आवंटन की कार्यवाही कर रही है। हालांकि नगरीय भूमि निष्पादन नियम 1974 के तहत परिषद इस भूमि को बीओटी आधार पर नहीं दे सकती है।
नगर परिषद ने शहर के चार प्रमुख स्थानों पर पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप अथवा बिल्ड, ऑपरेट एंड ट्रांसफर पद्धति से मल्टीस्टोरी पार्किग मय कॉमर्शियल कॉम्पलेक्स बनाने के लिए तकनीकी सलाहकार नियुक्त करने के लिए निविदा खोली थी। चार स्थानों में नया बाजार स्थित पशु चिकित्सालय भवन परिसर, खाईलैंड स्थित अग्निशमन विभाग की जमीन, स्टेशन रोड स्थित इंदिरा गांधी स्मारक और पुराना बस स्टैंड शामिल है।
परिषद सलाहकार की नियुक्ति करने के बाद डवलपर की नियुक्ति करेगा। परिषद ने पहले भी प्राइवेट बस स्टैंड की जमीन को बीओटी के आधार पर देने का फैसला किया था, लेकिन पार्षद सत्यनारायण गर्ग ने शिकायत की थी। इस पर परिषद के तत्कालीन आयुक्त शाहीन अली की अध्यक्षता में बनी कमेटी ने माना था कि बीओटी आधार पर भूमि का निष्पादन नहीं किया जा सकता है।
इसके बावजूद परिषद ने प्रभावशाली लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए बेशकीमती जमीन बीओटी के आधार पर बेचने की कोशिश शुरू कर दी है। इससे परिषद को करोड़ों रुपए का नुकसान होगा। परिषद भूमि की नीलामी में नीचे पार्किग और ऊपर व्यावसायिक कॉम्प्लैक्स बनाने की शर्त रख सकती है। इससे परिषद को काफी अच्छी आय होगी। सूत्रों का कहना है कि स्वायत्त शासन विभाग के एक आला अफसर के दबाव में परिषद इस कार्यवाही का अंजाम दे रही है।
बीओटी के आधार पर जमीन देने की प्रकिया काफी पहले से चल रही है। सरकार का दबाव है। नियमों में प्रावधान की जानकारी देखने के बाद ही कुछ बता सकता हूं।
-केएल अग्रवाल, आयुक्त प्रशासन, नगर परिषद
ये हैं नियम..
राजस्थान नगर पालिका भूमि निष्पादन नियम 1974 के नियम पांच के अनुसार भूमि का निष्पादन 99 वर्ष की लीज पर किया जा सकता है। नियमानुसार 1500 वर्गगज से अधिक भूमि के लिए वरिष्ठ नगर नियोजक से योजना पर तकनीकी राय लेकर कलेक्टर से पूर्व अनुमति लेकर ही भूमि का निष्पादन किया जा सकता है।
बीओटी आधार पर किसी प्राइवेट अथवा निजी फर्म को भूमि निष्पादन नियम के तहत भूमि नहीं दी जा सकती है। इसके अलावा भूमि निष्पादन के लिए नगर परिषद की साधारण सभा की अनुमति भी लेना आवश्यक है।