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40 सिटी बसें चल रही है शहर में

बीकानेर. bus 40 सिटी बसें शहर की सड़कों पर कई सालों से दौड़ रही है। यह आंकड़ा प्रादेशिक परिवहन अधिकारी कार्यालय का है लेकिन यह कागजी नहीं है। सिटी बसों के परमिट लेकर मिनी बसें स्कूलों में चल रही हैं। कुछ ग्रामीण रूटों पर भी दौड़ रही है।

परिवहन विभाग ने शहर में मिनी बसों को सिटी बसों के परमिट जारी किए हुए हैं। सालों से यह बसें स्कूलों में चल रही हैं, जबकि नियमानुसार इन्हें सिटी में चलना चाहिए। बाल वाहिनी के लिए अलग से पांच साल का परमिट जारी करने का प्रावधान है।

इसका टैक्स भी माफ है। सिटी बस के रूप में स्कूलों में चलने वाले वाहनों को टैक्स भरने के अलावा प्रतिमाह परमिट भी लेना पड़ता है। यदि कोई स्पेयर गाड़ी है तो उसके मालिक को हर माह 6600 रुपए टैक्स की मार सहनी पड़ती है। इसमें भी ऑल राजस्थान परमिट की गाड़ियों का टैक्स 15 हजार रुपए से अधिक है।

मिनी बस मालिकों की पीड़ा यह है कि प्रशासनिक सहयोग नहीं मिलने के कारण वे शहर में बसें नहीं चला पा रहे हैं। स्कूल संचालकों के लिखकर नहीं देने से बाल वाहिनी का परमिट नहीं मिल रहा। स्कूली बच्चों को लाना ले जाना ही इन बस मालिकों के रोजीरोटी का साधन बना हुआ है। इसके अलावा कुछ बसें परिवहन विभाग को गच्च देकर ग्रामीण रूटों पर भी दौड़ रही है।

अचरज की बात यह है कि इन सिटी बसों से प्रशासन और जनता भी अनजान है। शहर में नई सिटी बसें चलाने की तैयारी की जा रही है। नई बसें अगले माह से बीकानेर की सड़कों पर दौड़ने लगेंगी लेकिन सवाल यह है कि पहले से चल रही इन सिटी बसों का क्या होगा? नई सिटी बसों का ठेका उदयपुर की एक कंपनी को दिया गया है।

सरकार इस योजना पर लाखों रुपए भी खर्च कर रही है, जबकि शहर में पहले से उपलब्ध मिनी बसों की तरफ किसी का ध्यान नहीं गया। ऐसा नहीं है कि मिनी बस मालिकों ने इसके लिए पहल नहीं की हो। कुछ लोग जिला कलेक्टर से मिले थे लेकिन उनकी सुनी ही नहीं गई। यही नहीं सलाहकार समिति में भी मिनी बस मालिकों को शामिल करने के बजाय ऑटो रिक्शा यूनियन के नेताओं को शामिल किया गया है।

हालात यह है कि नई बसों के लिए निर्धारित किए गए मार्गो में कई महžवूपर्ण मार्ग शामिल नहीं किए गए। इन मार्गो को ऑटो रिक्शाओं के लिए छोड़ दिया गया है जिसका खमियाजा आमजन को भुगतना पड़ेगा।

शहर में कोई सिटी बस नहीं चल रही है न ही मुझे जानकारी है। यहां तो ऑटो रिक्शा ही चलते हैं। नई बसें अगले माह से चलेंगी। अगले सप्ताह समिति की बैठक होगी, जिसमें महžवपूर्ण निर्णय लिए जाएंगे।
-मकसूद अहमद, सभापति, नगर परिषद

सिटी बसों के परमिट लेकर चलने वाली बसों की जांच करवाई गई थी। जांच रिपोर्ट भी आ गई है। उनका फैसला सचिव, प्रादेशिक परिवहन प्राधिकार के समक्ष किया जाएगा।
सतवीर यादव, आरटीओ

जिला प्रशासन को शहर में पहले से चल रही सिटी बसों को महžव देना चाहिए। पूर्व में सिटी बस चलाने की योजना लागू होने पर अनेक लोगों ने लाखों रुपए खर्च करके बसें खरीदी थी लेकिन प्रशासन का सहयोग नहीं मिलने के कारण बसें नहीं चल सकीं।
-मदन पंवार, अध्यक्ष, कार-जीप-टैक्सी यूनियन

प्रशासन सहयोग करे तो हम शहर में सिटी बसें चलाकर दिखा सकते हैं। सरकार व्यर्थ ही बाहर की कंपनी पर लाखों रुपए खर्च कर रही है, जबकि शहर में सिटी बसें बड़ी संख्या में उपलब्ध है।
-नीरज पेड़िवाल, सिटी बस संचालक

कर्मचारी संगठनों ने उठाई आवाज

परिवहन विभाग के रथखाना स्थित पुराने भवन से लर्निग लाइसेंस का काम बीछवाल शिफ्ट करने के विरोध में कर्मचारी संगठन भी आगे आ गए हैं। राजस्थान कर्मचारी महासंघ (एकीकृत) के अध्यक्ष शंकर पुरोहित ने रथखाना स्थित पुराने कार्यालय पर ऑटो वाहन चालक संघ के चल रहे धरने का समर्थन करते हुए कहा है कि लर्निग लाइसेंस का काम शहर से 20 किलोमीटर दूर शिफ्ट करके विभाग ने शहर के वृद्धजनों और छात्राओं के साथ अन्याय किया है। उन्हें लाइसेंस बनवाने में भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।

अभिभावक छात्राओं को इतनी दूर अकेले भेजने से डरते हैं। वहां तक पहुंचने के लिए श्रीगंगानगर रोड हाइवे से गुजरना पड़ता है, जहां भारी वाहनों की आवाजाही रहती है। दुर्घटना की आशंका हर वक्त मंडराने के कारण लोग इतनी दूर जाने से कतराने लगे हैं। यदि प्रशासन ने यह कार्य वापस पुराने ऑफिस शिफ्ट नहीं किया तो आंदोलन किया जाएगा।

शिक्षक संघ डी के अध्यक्ष दिलीप जोशी ने परिवहन कार्यालय में भ्रष्टाचार पनपने का आरोप लगाते हुए कहा है कि शहर से दूर कार्यालय ले जाने का उद्देश्य यही था, ताकि जनता को विभाग के कारनामों का पता नहीं चल सके।

राजस्थान ऑटो चालक यूनियन के संयोजक हेमंत किराड़ू ने इस मुद्दे को लेकर न्यायालय में जाने की चेतावनी दी है। किराड़ू का कहना है कि राज्य सरकार के आदेश नहीं होने के बाद भी कार्यालय को शिफ्ट कर दिया गया है। लाइसेंस का काम पुराने कार्यालय में ही किया जाना चाहिए, ताकि लोगों को काम करवाने में सुविधा रहे। विभाग ने इस पर शीघ्र ही निर्णय नहीं लिया तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।





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