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हर ओर रजिस्टर्ड होने का रोमांच

बीकानेर. marriage हाथ में शादी का फोटो आते ही वर्षो बाद दंपतियों के चेहरे पर रौनक आ गई और एक बार फिर वे पुरानी यादों में खो गए। ये नजारे रविवार को मावा पट्टी के लक्ष्मीचंद मोहता भवन में लगे विवाह पंजीकरण शिविर में दिखाई दिए। सैकड़ों दंपतियों को स्मृतियों को ताजा करने का यह मौका दिया दैनिक भास्कर, भारत विकास परिषद और नगर परिषद के साझे प्रयास ने।

विवाह पंजीकरण के इस तीसरे शिविर में रविवार को 252 दपंतियों ने पंजीकरण के लिए आवेदन किया। उत्साह के साथ शिविर स्थल पर पहुंचे दंपतियों ने पंजीकरण संबंधी औपचारिकताएं पूरी करने का काम अलग-अलग बांट लिया। एक ने स्टांप खरीदे तो दूसरा नोटेरी से सत्यापित करवा रहा था।

पत्नी जहां एडवाइजर को लेकर पहुंची तो पति महोदय ने पंडित की ओर से की जाने वाले कार्रवाई को पूरा करवाया। इतनी सारी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद जब पंजीकरण करने वालों के पास पहुंचे तो एकबारगी वे शरमा गए। शादी का फोटो देखते हुए यादें ताजा हो आई।

पंजीकरण के कागजात जमा करवाकर लौटते समय उनके चेहरे पर सुकून और हल्की मुस्कान थी। करीब तीन साल पहले शादी के बंधन में बंधने वाली अनुराधा पुरोहित अपने पति ऋषि कुमार के साथ सुबह 11 बजे ही विवाह का पंजीकरण करवाने के लिए पहुंच गई। पवनपुरी साउथ एक्सटेंशन से जब यह जोड़ा शिविर स्थल पहुंचा तो पता चला की गवाहों की आईडी भी साथ लानी जरूरी है।

शिविरस्थल से ही इन्होंने गवाहों को आईडी पहुंचाने के लिए आग्रह किया। इस दंपती को इस बात की खुशी थी कि उसकी शादी अब सरकारी तौर पर भी पंजीकृत हो जाएगी।

केईएम रोड से आए शैलेन्द्र पालीवाल और शोभा पालीवाल को इस बात की खुशी थी कि उन्हें शादी का पंजीकरण करवाने के लिए न तो स्टांप वालों के चक्कर निकालने पड़े और न ही नोटेरी से सत्यापित करवाने के लिए इधर-उधर दौड़ना पड़ा। उन्हें सारी व्यवस्थाएं एक ही छत्त के नीचे मिल गई। भीनासर से पहुंचे जुगलकिशोर सेवग और उनकी पत्नी सुनीता ने और तो सभी डाक्यूमेंट पूरे कर लिए लेकिन अपने माता-पिता और पंडित के हस्ताक्षर नहीं करवाने के कारण उन्हें दो बार शिविरस्थल के चक्कर निकालने पड़े।

उन्होंने सामाजिक सरोकार को निभाने की पहल करने वाले दैनिक भास्कर, भाविप और नगर परिषद के प्रयासों की सराहना की। लालाणी व्यासों के चौक से पहुंचे आनंद आचार्य और विजयश्री भी का कहना है कि विवाह पंजीकरण की सारे औपचारिकताएं एक ही दिन में पूरी करने से उन्हें इस बात का सुकून मिल गया कि अब अगले शिविर में उन्हें प्रमाण-पत्र भी मिल जाएगा। उनका कहना है कि ऐसे शिविर और भी लगे और हर मोहल्ले में लगाए जाए तो लोगों को राहत मिलेगी।





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Ashutosh Acharya
Tuesday, 1st Jul 2008, 9:34
This camp seemed very helpful for those persons who live so far and cannot easy approachable to the court for making such certificates and they have to wander for it so many times. Since such camp is held in the middle of the city and persons who have not made such certificates so far, so nobody didn't find any problem and they register themselves through such camps and I hope it would be much better if such camps should keep on organising time to time for keeping in mind of the each and every person's neccessity.