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दवा खरीद में लाखों की हेराफेरी

जोधपुर.med मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय में वर्ष 2004-05 के दौरान दवा खरीद में अनियमितताएं उजागर हुई है। तत्कालीन सीएमएचओ ने लेखा नियमों को ताक में रखकर लाखों रुपए की दवाएं खरीद ली। बजट नहीं होने के बावजूद दवा कंपनियों को क्रय आदेश देकर विभाग को लाखों की चपत लगा दी।

दवाइयों की खरीद में करीब 67 लाख रुपए से ज्यादा के अनियमित आदेश जारी कर दिए गए। अनियमित खरीद-फरोख्त के चौंकाने वाले मामले में तत्कालीन सीएमएचओ डा. संतोषसिंह गहलोत ने लेखा अधिकारियों की विपरीत टिप्पणियों की भी परवाह नहीं की।

मामले की भनक लगने पर निदेशालय ने जांच करवाई तो घपले का पर्दाफाश हुआ। आनन-फानन में इस मामले में दोषी तत्कालीन सीएमएचओ (वर्तमान में संयुक्त निदेशक मलेरिया) डा. गहलोत को चार्जशीट थमाई गई है। डा. गहलोत 30 जून को ही रिटायर हो रहे हैं। चूंकि खरीद में विभाग के अन्य कार्मिकों की भी भूमिका रही है, लिहाजा निदेशालय अब इस मामले में दोषी अन्य लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।

चिकित्सा निदेशक डॉ.ओ.पी.गुप्ता से बातचीत

>> जोधपुर में वर्ष 2004 से 2005 में दवाएं बिना डिमांड के खरीदने के मामले में क्या हुआ?
डॉ. गुप्ता-जांच तो पूरी हो चुकी है। इस प्रकरण में तत्कालीन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.एस.एस.गहलोत को शनिवार को चार्जशीट दी गई है।
>> क्या फर्र्मो को भुगतान कर दिया गया है?
कानून कायदे ताक पर रखकर दवाएं खरीदी गई हैं। इस मामले में और लोग भी लिप्त हैं। पहले उनके विरुद्ध जांच हो जाए, फिर फर्मों के माल का वेरिफिकेशन होगा,उसके बाद ही भुगतान होगा।

बिना जरूरत खरीदी गोलियां
तत्कालीन सीएमएचओ ने मै. सीमा मेडिकल से 29,950 रु. की फ्लूकॉनोजोल टेबलेट बिना जरूरत ही खरीद ली। दवा खरीदने के लिए खुली निविदाएं मांगने के सहा.लेखाधिकारी की टिप्पणी नजरअंदाज की।

कागजों में बता दी मांग
चद्दर, डस्टर व दरियों की 8 लाख 6800 रुपए की खरीद के लिए स्टोर कीपर ने मांग आए बिना जरूरत बता दी। जिस कंपनी को क्रय आदेश दिया गया था, उसने भी सही समय पर माल की सप्लाई नहीं की।

खरीद के लिए मंजूरी तक नहीं ली
एक कंपनी को फायदा पहुंचाने 1,20,200 रुपए के सर्जिकल लीनन थ्रेड की खरीद की गई, जबकि बजट था ही नहीं। न मांग थी, न ही बजट। यहां तक कि सीएमएचओ ने इस खरीद के लिए क्रय समिति से मंजूरी तक नहीं ली।

सीएमएचओ ने दिए आदेशसीएमएचओ ने मेकिनटॉस सीट की खरीद के लिए एक कंपनी को सीधे ही आदेश दे दिए। इसके लिए 49 हजार 600 रुपए का क्रय आदेश दिया गया। जबकि क्रय समिति और सहायक लेखाधिकारी को ताक में रख दिया गया। इसी तरह बजट नहीं होते हुए भी 85 हजार 500 रुपए की टॉवेल खरीद का आदेश दे दिया गया।

गॉज-बेन्डेज की खरीद के लिए तो निदेशक की अनुमति भी नहीं मांगी गई। क्रय समिति और लेखाधिकारियों को दरकिनार करते हुए तत्कालीन सीएमएचओ ने सप्लाई करने वाली फर्म को लाभ पहुंचाया। इसके लिए 10 लाख 27 हजार 500 का खरीद आदेश दिया गया,जबकि माल की गुणवत्ता तक नहीं जांची गई।

हर खरीद में अनियमितताएंसबसे बड़ी अनियमितताएं दवा खरीद में हुई। करीब 43 लाख 66 हजार 845 रुपए की दवाओं की खरीद के आदेश देते वक्त सीएमएचओ ने यह तक नहीं देखा कि उपलब्ध बजट से पूर्व की देनदारियां भी चुकता नहीं हो पा रही हैं।





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