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कोटा की राहें. आह..कराहें

कोटा. बढ़ते सड़क हादसों ने नागरिकों का चैन छीन लिया है। शहर के बीच से गुजरते हाइवे आए दिन रक्तरंजित हो रहे हैं। वाहनों की संख्या में खासा इजाफा होने से बढ़ रहा है सड़कों पर यातायात का दबाव। एक्सीडेंटल जोन बढ़े हैं, तो बढ़ रहा है लोगों का गुस्सा भी, लेकिन घट रही है तो ट्रैफिक महकमे की नफरी और जनता में जागरूकता।

अव्यवस्थित यातायात के कारण शहर में प्रतिदिन दुर्घटनाएं होती हैं और जाम लगता है। स्थिति इतनी विकट हो गई है कि करीब आधा दर्जन से अधिक स्थान ‘एक्सीडेंटल जोन’ बन गए। जाम से गंतव्य तक पहुंचना तक मुश्किल हो रहा है। भीषण दुर्घटना में कई अपनों को खो रहे हैं तो कहीं दुर्घटना में अपंगता अभिशाप मिल रहा है। हर रोज बिलखते हैं परिवारजन। यह बेसहारे पूछते हैं हररोज कि, आखिर किसकी थी खता।

1296 वाहन पर एक जवान
शहर में पौने दो लाख वाहन तथा शहर से दो हाइवे 12 व 76 गुजरते हैं। इन सब की व्यवस्था संभालने के लिए मात्र 135 पुलिसकर्मी है। यानि एक पुलिसकर्मी औसतन 1296 वाहनों को संभालता है।

बड़े वाहनों के प्रति बढ़ा रुझान
अब लोगों को रुझान लक्जरी वाहनों के प्रति बढ़ा है। इसके चलते शहर में यातायात का दबाव कई गुना बढ़ गया है। वर्ष 01 में 13349 नए वाहन सड़कों पर उतरे। वहीं वर्ष 07 में 23362 दो पहिया व 2132 कारें बिकी हैं। अन्य वाहनों की बिक्री मिलाकर आंकड़ा दोगुने से ज्यादा है। वर्तमान में शहर में करीब पौने दो लाख वाहन है।

समझाइश व चालान बेअसर
यातायात पुलिस द्वारा वाहन चालकों को यातायात के नियमों की जानकारी देती है। चैकिंग अभियान चलाकर चालान भी बनाए जाते हैं। डीएसपी (ट्रैफिक) के.डी. चारण के अनुसार, हर वर्ष करीब 70 हजार वाहन चालकों की समझाइश की जाती है। गत वर्ष 54341 चालान बनाए, जो वर्ष 2006 से 6 हजार ज्यादा थे। इन लोगों से 85.53 लाख रुपए जुर्माना राशि वसूली।





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