उदयपुर. देलवाड़ा के जैन मंदिरों की व्यवस्था को लेकर स्थानीय जैन श्वेताम्बर महासभा और देलवाड़ा जैन सोसायटी के बीच विवाद एक बार फिर गहरा गया है। शनिवार को सुलह का उजाला दिखाई दिया, लेकिन रविवार को एक बार फिर रोड़े का अंधेरा आ गया।
शनिवार को दोनों पक्षों ने मंदिर की भव्यता और ख्याति के लिए साझा प्रयास की दुहाई देते हुए मिल-बैठकर विवाद के निस्तारण के प्रयास की बात कही थी, लेकिन रविवार को दोनों ही पक्षों ने अपने-अपने स्तर पर बैठकेंकी। देलवाड़ा जैन समाज ने कहा कि मंदिर हरगिज नहीं लौटाए जाएंगे जबकि महासभा ने कहा कि कानून से लेंगे।
महासभा की एक्शन कमेटी की बैठक हाथीपोल जैन धर्मशाला में हुई। इसमें सर्वसम्मति बनी कि मंदिरों को ससम्मान नहीं लौटाया गया तो अदालत की शरण ली जाए। महासभा ने कानून विशेषज्ञों के समक्ष देलवाड़ा मंदिर के मूल दस्तावेजों को प्रस्तुत किया। विशेषज्ञों से कहा गया कि वे दस्तावेजों का अध्ययन कर समाज हित में निर्णय लें।
बैठक में महासभा अध्यक्ष किरणमल सावनसुखा ने कहा कि समाज हित में ही कोई निर्णय लिया होगा। मूर्तिपूजक संघ चाहता है कि जिस सम्मान से देलवाड़ा जैन समाज ने उन्हें पूर्व में मंदिर को सौंपा था, उसी सम्मान के साथ मंदिर लेने की प्रकिया अपनाई जानी चाहिए थी।
देलवाड़ा समाज को चाहिए कि वह पूर्व की स्थिति बहाल करते हुए महासभा को ससम्मान मंदिर का कब्जा सौंप दे। महासभा अध्यक्ष ने कहा कि यदि देलवाड़ा जैन समाज महासभा के स्वामित्व वाले मंदिरों और अन्य चल-अचल संपत्ति को लौटा दे तो सर्वसम्मति से विवाद का हल निकाला जा सकता है। यदि देलवाड़ा समाज जैन मंदिरों को लेना चाहता हैं तो उसे पहले अवैधानिक रूप से किए कब्जे को मुक्त करना होगा।
समाज घटकों की बैठक आज
बैठक में अध्यक्ष ने कहा कि मूर्तिपूजक समाज के सभी घटकों के पदाधिकारियों की बैठक बुलाकर महासभा का पक्ष रखा जाए। इसके लिए सोमवार को सभी पदाधिकारियों की बैठक शाम 4 बजे बुलाने का निर्णय हुआ।
गृहमंत्री की मध्यस्थता में हो निर्णय
देलवाड़ा जैन समाज के मार्गदर्शक हीरालाल कटारिया ने कहा कि महासभा को चाहिए कि वह मंदिर विकास को लेकर लक्ष्य तय करें। महासभा अध्यक्ष सावनसुखा अपना अनशन का निर्णय और गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया के खिलाफ निंदा प्रस्ताव सहित बहिष्कार के निर्णय को वापस लें। इसी प्रकार गृहमंत्री की मध्यस्थता में मंदिर विवाद का सम्मानजनक हल निकालें।
मंदिर महासभा को नहीं सौंपने का संकल्प
देलवाड़ा. देलवाड़ा जैन कमेटी की रविवार को मांगीलाल कटारिया की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में समाज के सदस्यों ने समाज के स्वामित्व की सम्पत्ति व मंदिर आदि पर किसी भी स्थिति में महासभा का आधिपत्य नहीं होने देने का संकल्प लिया गया। संयोजक औंकारसिंह सिरोया, रूपलाल कटारिया आदि की उपस्थिति में आयोजित बैठक में समाज के मंदिरों में सेवा-पूजा व आंगी की व्यवस्थाओं के लिए सदस्यों ने आर्थिक सहयोग देने पर सहमति जताई। बैठक में समाज के डालचंद सिंघवी ने मंदिरों की साफ-सफाई व रख-रखाव के लिए एक लाख 5 हजार रुपए तथा मोहनलाल लोढा ने एक लाख एक हजार रुपए देने की घोषणा की।
इसके अलावा 60 सदस्यों ने 300-300 रुपए प्रतिमाह देने की घोषणा की। बैठक में मंदिर में कार्यरत पुजारियों व अन्य कर्मचारियों के मेहनताने में भी बढ़ोतरी करने तथा हर रविवार को समाज के प्रतिनिधियों द्वारा पूजा-अर्चना करने का निर्णय लिया गया।
बैठक में संघर्ष समिति का भी गठन किया गया, जिसमें गणोश चौहान संयोजक, श्यामलाल मेहता उप संयोजक तथा मांगीलाल कटारिया, मनोहरलाल खेतपाल्या, रूपलाल कटारिया, श्याम सिरोया, औंकारसिंह सिरोया, अनिल लोढ़ा, रमेश मेहता, शेरसिंह छाजेड़, सुरेश मांडावत व राजेंद्र खेतपाल्या सदस्य मनोनीत हुए। इसके अलावा 11 सदस्यों की संरक्षण समिति भी बनाई गई।