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इंदौर. घटना का मुख्य आरोपी राजेंद्र नागर उज्जैन की गिरनार होटल में इंदौर का पता लिखवाकर रुका था। होटल के रिसेप्शनिस्ट सुनील शर्मा ने बताया आरोपी राजेंद्र नागर पिछले एक माह से सुबह इंदौर जाकर शाम को लौट आने की बात कहता था।
मंदिर के पास था आना-जाना
किडनी कांड के मुख्य सरगना राजेंद्र नागर डेढ़ साल से अपने उज्जैन के स्थायी पते पर नहीं पहुंचा। पुलिस के अनुसार वह इस दौरान इधर-उधर घूमकर अपना नेटवर्क फैलाता रहा। इसमें मुख्य रूप से इंदौर का नाम लिया जा रहा है। नागर का संबंध में इंदौर में खजराना गणोश मंदिर व गणोशपुरी कॉलोनी में कई सालों से है।
यहां तक की दो माह पहले तक हर दूसरे-तीसरे दिन बाद इंदौर के खजराना मंदिर परिसर में स्थित जय गणोश प्रसाद भंडार में अपने साले दुर्गेश नागर के पास आता था। हालांकि वह इंदौर में किस जगह रहता था इस बारे में दुर्गेश का कहना कि उसने कई बार पूछा मगर इसकी जानकारी नहीं दी।
दुकान पर नागर के बेटे विकास ने भी कई दिनों तक परसाद बेचा है। यहां विकास को मंदिर के आस-पास के लोग अच्छी तरह से जानते हैं। दुर्गेश ने बताया कि बहन की मौत के बाद जीजाजी ने फिर परिवार की ओर मुड़कर नहीं देखा। उनका मकसद केवल पैसा कमाना ही रह गया था।
मकान की जगह प्लाट मिला
उज्जैन की गिरनार होटल में 56, गणोपुरी कॉलोनी इंदौर का पता लिखा हुआ था। यहां मनीष दीक्षित का मकान था। कुछ माह पहले ही यह मकान पीथमपुर थाना प्रभारी बी.पी. परिहार के माध्यम से यहीं के कॉलोनाइजर ओमप्रकाश वर्मा के बेटे जय वर्मा को बेचा था। प्लाट की कीमत अच्छी मिलने पर यहां बना मकान गिरवा दिया गया। जय का कहना है कि नागर ने यहां का पता क्यों लिखवाया यह समझ से परे हैं। हालांकि वे अपने आप को उनका दूर का रिश्तेदार भी बताते हैं।
इधर जब यह प्लाट किसी और के बेचा गया तो तब सर्च रिपरेट में पता चला कि इसका मकान नंबर 56 नहीं 292 गणोशपुरी है। इसमें नागर कभी नहीं रहा। कुछ दिन पहले ही पुलिसकर्मी यह मकान नंबर ढूंढ़कर चले गए मगर उन्हें नहीं मिला। इस मामले में टीआई श्री परिहार का कहना है वह उनके मित्र का मकान था इसलिए उसे बिकवाने में सहयोग किया इसमें नागर से कोई संबंध नहीं है।
थाना प्रभारी पहले से जानते थे मुख्य आरोपी को
किडनी कांड में पकड़े गए आरोपी उज्जैन नगर निगम में कार्यरत कर्मचारी राजेश सेन के मौसा ससुर शंकर सेन ने बताया कि वह राजेश व नागर को कई सालों से जानता है। नागर को महाकाल थाना प्रभारी श्री धाकड़ पहले से जानते थे। इस मामले में कुछ माह पहले थाने में पहुंची शिकायत पर मैं उनका दोस्त होने के नाते पांच बार उनके साथ थाने आया हूं। मैं पुलिस में कई वरिष्ठ अधिकारियों का नाई हूं इसलिए पुलिस से अच्छा संबंध है।
एक शिकायत पर श्री धाकड़ को गुजरात में हुई किडनी ट्रांसप्लांट के कागजात भी दिखाए थे जिसमें राजी-मर्जी से किडनी दान करने की बात सामने आई। इस पर टीआई ने उन्हें छोड़ दिया था। नागर पहले चार बार इस मामले में कोर्ट से बरी हो चुके हैं। दरअसल आर्थिक परेशानी में फंसे लोग खुद ही नागर के पास किडनी देने के लिए मर्जी से आते थे। यह बात किडनी देने वालों ने पुलिस थाने में भी स्वीकारी।
झूठ बोल रहे हैं रिश्तेदार- धाकड़
नागर को पहले से जानने की बात पर इनकार करते हुए टीआई श्री धाकड़ ने कहा कि रिश्तेदार झूठ बोल रहे हैं। यदि मैं इसे पहले से जानता होता तो पकड़ नहीं लेता। यह नौबत क्यों आती?