|
इंदौर. उज्जैन किडनी कांड में पकड़े गए चार आरोपियों में से उज्जैन के राजेश सेन के परिजन शंकर सेन ने खुलासा किया कि चेन्नई और इंदौर के पुलिस अफसरों को किडनी ट्रांसप्लांट की गई है। इस काले कारोबार में इंदौर के दो लोग सीधे तौर पर लिप्त बताए जाते हैं।
इन लोगों ने किडनी बेचने वाले कुछ लोगों को इंदौर जाकर संबंधित पार्टियों से मिलवाया था। पूरे मामले में 17 प्रकरण सामने आए हैं जिनमें छह के पते इंदौर के हैं। हालांकि पुलिस जांच में यह पते फर्जी पाए हुए। पुलिस उक्त पतों का खुलासा नहीं कर रही है। महाकाल टीआई के मुताबिक जांच दल इंदौर, अहमदाबाद और चेन्नई भेजे गए हैं।
चोईथराम अस्पताल का नाम आया
महाकाल थाने के टीआई ओ.पी. धाकड़ ने भास्कर संवाददाता को बताया कि इसमें इंदौर के चोईथराम अस्पताल सहित अहमदाबाद और चैन्नई के अस्पताल में फर्जी कागजों के आधार पर किडनी बेची गई। इसमें किडनी बेचने वालों को पीड़ित का रिश्तेदार बता दिया जाता था।
उधर चोईथराम अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. शिखर जैन का कहना है हम किडनी का ट्रांसप्लांट केवल रिश्तेदार होने की स्थिति में ही करते हैं। यदि गलत कागजात के आधार पर कोई किडनी ट्रांसप्लांट हुई है तो मुझे इसकी जानकारी नहीं है।
दो दिन के बाद ही कुछ कह सकूंगा
उज्जैन एसपी मनमीतसिंह नारंग के मुताबिक आरोपियों से पूछताछ में जो बात सामने आई है इसकी जांच अन्य राज्यों से भी करवाई की जा रही है। यही कारण है इस मामले में दो दिन बाद ही कुछ कह पाऊंगा।
टीआई और सीएसपी के बयान जुदा-जुदा
टीआई और सीएसपी के बयान मेल नहीं खा रहे हैं। महाकाल थाना प्रभारी ओ.पी. धाकड़ ने इंदौर के चोईथराम अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट कराने की बात सामने आने की जानकारी दी। जो भास्कर संवाददाता के पास रिकॉर्डेड है। इस पर सीएसपी अरविंद तिवारी का कहना है कि अभी जांच चल रही है, इसलिए जानकारी नहीं दी जा सकती।
जांच दल केवल अहमदाबाद ही भेजा गया है। इंदौर में जांच दल भेजने की बात से ही इनकार कर दिया। सीएसपी ने यह भी कहा कि टीआई को ज्यादा जानकारी नहीं है। इस पर टीआई ने रविवार रात करीब 9 बजे कहा अब इस मसले पर सीएसपी से ही बात करें। मैने तो रिकॉर्ड देखकर ही बताया था।
नाम कौन पूछे, पैसे से मतलब
विजयनगर में मिलाया था
नागर के माध्यम से किडनी देने वाले राजेश बैरवा का कहना है कि उसे नागर जनवरी 08 में इंदौर ले गए थे जहां विजयनगर के पॉवर हाउस के पास एक घर में किसी से मुलाकात करवाई थी। इसके तीन माह बाद उसी व्यक्ति को अहमदाबाद ले जाकर किडनी दी गई। वह कौन था उसका नाम उसे नहीं पता। मेरे कुछ कागजात तैयार करवाए गए थे जिसमें मुझे किडनी देने वाले का रिश्तेदार बताया गया था।
डीआईजी को लगाई किडनी
उज्जैन में हीरामिल की चाल में स्थित मायापुरी कॉलोनी निवासी राजेश टाटावत से नागर ने एक साल पहले एक लाख रुपए में किडनी का सौदा किया था। नागर ने कहा था कि उसके दोस्त सुधीर भाई को किडनी की जरूरत है। उसे ट्रेन से चेन्नई ले गया जहां एक होटल में रुकवाया। यहां एक डीआईजी को किडनी लगाई गई। यह मुझे बाद में पता चला। वह कौन है इसका नाम नागर को पता है। नागर ने केवल 80 हजार रुपए ही दिए थे।
..और किडनी देने से मना कर दिया
हीरामिल की चाल में रहने वाले एक अन्य मजदूर धर्मेद्र भदौरिया का कहना है उन्हें पुलिस की गिरफ्तारी के कुछ समय पहले ही मुझे डेढ़ लाख में किडनी बेचने का लालच दिया था मगर परिवार के कहने पर मैंने नागर की बात पर ध्यान नहीं दिया।
इंदौर के पुलिस अधिकारी को भी!
शंकर सेन का कहना है कि पिछले चार सालों में अधिकांश किडनी पुलिस अधिकारियों को दी गई है। इसमें इंदौर में भी एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को किडनी दी थी। इनका नाम मुझे नहीं बताया गया। दोनों ने मुझे केवल इतनी ही जानकारी दी थी।
नागर ने यह बात पुलिस को भी बताई है। हालांकि सीएसपी अरविंद तिवारी इससे मना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आरोप लगाने वाले शंकर का पुलिस से कोई संबंध नहीं है वे उसे नहीं जानते। कोई कुछ भी आरोप लगाने के लिए स्वतंत्र है।