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Chandigarh Chandigarh चंडीगढ़. फिजिकली चैलेंज्ड स्टूडेंट्स के लिए शहर के स्कूलों में सुविधाएं न होने का खमियाजा श्वेता को अपना करियर दाव पर लगाकर उठाना पड़ रहा है। फिजिकली चैलेंज्ड श्वेता को यह कह कर एडमिशन देने से मना किया जा रहा है कि स्कूलों में उसके लिए वे सुविधाएं नहीं हैं, जो उसके लिए जरूरी हैं।
बलटाना की श्वेता अरोड़ा को पंचकूला के जाने-माने स्कूलों ने सिर्फ उसकी डिसएबीलिटी के चलते प्लस वन में एडमिशन देने से मना कर दिया। इसकी शिकायत श्वेता ने सीबीएसई ऑफिस में की है। कंजेनीटल एनोमली से पीड़ित श्वेता, अपनी भावनाओं को रोक नहीं सकीं और उसने भास्कर को आपबीती बताई। श्वेता बतातीं है, मेरा सपना था कि 10वीं के बाद किसी अच्छे प्राइवेट स्कूल में एडमिशन लूं।
एडमिशन के लिए मैंने मेहनत करके 10वीं के आईसीएसई बोर्ड में 65 फीसदी मार्क्स स्कोर किए। पर मेरा सपना तब बिखर गया, जब प्राइवेट स्कूलों ने बहाना बना कर मुझे एडमिशन देने से मना कर दिया।
11वीं की आर्ट्स स्ट्रीम में एडमिशन के लिए मैंने पंचकूला के बहुत से आईसीएसई बोर्ड और सीबीएसई बोर्ड के दो जाने-माने स्कूलों में एडमिशन के लिए ट्राई किया। पर आईसीएसई बोर्ड के स्कूलों में प्लस वन क्लासें नहीं होने से एडमिशन नहीं मिला।
वहीं, सीबीएसई बोर्ड के दो स्कूल भवन विद्यालय, सेक्टर-15 पंचकूला और सेंट सोल्जर पैराडाइज पब्लिक स्कूल, ढकोली ने बहाने बना कर एडमिशन देने से मना कर दिया।
श्वेता कहती हैं, भवन विद्यालय, सेक्टर-15 पंचकूला में उसे सुनने को मिला, हमारे यहां 11वीं की क्लासें अलग-अलग जगहों पर होती हैं, इसीलिए उसे एक क्लास से दूसरी क्लास में ले जाना संभव नहीं हो पाएगा।
वहीं सेंट सोल्जर पैराडाइज पब्लिक स्कूल ने यह कहकर एडमिशन देने से मना कर दिया कि स्कूल में 11वीं की क्लासें तीसरी मंजिल पर लगती हैं। स्कूल प्रशासन इतना बड़ा रिस्क नहीं ले सकता। श्वेता कहती हैं, यह जवाब सुनने के बाद मेरी मदर ने यहां तक कहा कि तीसरी मंजिल तक लाने और ले जाने की जिम्मेदारी उनकी है, बावजूद इसके पॉजीटिव जवाब नहीं मिला।
नहीं ली मदद
श्वेता की मदर पूजा कहती हैं, यह सही है कि चलने-फिरने के लिए श्वेता को सहारे की जरूरत होती है, लेकिन किसी भी एग्जाम में उसने लिखने के लिए हेल्पर की मदद नहीं ली।
8वीं तक 75-80 फीसदी अंक लिए
लिटिल फ्लावर स्कूल की स्टूडेंट श्वेता 57 परसेंट डिस्एबल्ड है, बावजूद इसके 8वीं तक उसने 75 से 80 फीसदी अंक हासिल किए।
क्या बीमारी है श्वेता को
श्वेता का इलाज कर रहे पीजीआई के न्यूरोसर्जन डॉ. आशीष पाठक कहते हैं, श्वेता को बचपन से कंजेनीटल एनोमली है, जिसमें उसके क्राइनो वर्टीव्रल जंगशन की डवबलपमेंट एब्नॉर्मल हो गई थी, जिसके कारण ब्रेन से निकलने वाली स्पाइन कॉर्ड दब रही थी। इसे सामान्य करने के लिए श्वेता की पांच बार सर्जरी की गई। उसमें इम्प्रूवमेंट तो हुआ है, लेकिन फिजिकली वह आत्मनिर्भर नहीं हो पाई है, लेकिन उसका ब्रेन बहुत शार्प है।