HomeBusinessCorporate Corporate

यात्रियों के टोटे से एयरलाइंस के नुकसान की शुरुआत

बेंगलूर एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) की कीमतें रिकार्ड स्तर पर पहुंचने से पहले ही यात्रियों की बेरुखी से एयरलाइंस संकट में आ चुकी थीं। इस वर्ष जनवरी से मार्च के बीच देश की प्रमुख एयरलाइंस के विमानों को 20 फीसदी तक खाली सीटों के साथ उड़ान भरनी पड़ी, जिसके कारण उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने रही सही कसर भी पूरी कर दी।

पुरानी है नुकसान की कहानी :

कम किरायों पर उड़ान भरने वाली कंपनी डेक्कन एविएशन को ३१ मार्च २क्क्७ को समाप्त तिमाही में २१३ करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका था। इस समय कच्चे तेल की कीमतें ७क् डालर प्रति बैरल थीं।

प्रतिद्वंद्विता में पिटी कंपनियां :

बढ़ती प्रतिद्वंद्विता में अपने को दूसरे से बेहतर सिद्ध करने के लिए विमानन कंपनियां टिकटों को भारी डिस्काउंट के साथ बेच रही थीं। इसके बावजूद यात्री न इकट्ठा कर पाने के चलते उनकी माली हालत बिगड़ गई।

घटती मांग का कहर :

जनवरी मार्च के दौरान २क् फीसदी ओवरकैपेसिटी दर्ज करने के बावजूद एयरलाइंस ने सबक नहीं लिया। इसके चलते इसी तिमाही में उन्हें १८ फीसदी अतिरिक्त नुकसान उठाना पड़ा। इस दौरान यात्रियों की संख्या पिछले वर्ष समान अवधि की तुलना में घट कर ११ फीसदी तक पहुंच चुकी थी।

एटीएफ ने ढाया कहर :

एटीएफ की कीमतें बढ़ने से अकेले जेट को ९क् करोड़ का नुकसान हो चुका है। इसके बाद भी कंपनियां यात्रा भाड़ा नहीं बढ़ा सकती हैं, क्योंकि इससे यात्री और दूर हो जाएंगे और नुकसान बढ़ जाएगा।

एयरलाइंस पर चौतरफा मार

ओवरकैपेसिटी (ज्यादा क्षमता) : जनवरी से मार्च के बीच विमानों को 20 फीसदी खाली सीटों के संग उड़ान भरनी पड़ी।

बढ़ती कीमतें : जेट फ्यूल की कीमतों में दोगुनी वृद्धि ने पहुंचाया भारी नुकसान।घटती मांग: सीटें घटाने के बावजूद एयरलाइंस घटती मांग का सामना करने को मजबूर हैं।





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: