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शिमलाब्रिटिश शासनकाल में शिमला में बनाई गई देश की पहली टनल का अस्तित्व खतरे में है। संजौली टनल (अब ढली टनल) के नाम से विख्यात इस ऐतिहासिक टनल में जगह-जगह गड्ढे बन गए हैं।
टनल की हालत इतनी खस्ता है कि इसके नीचे से पैदल गुजरना भी मुश्किल है। टनल पर अब ट्रैफिक दबाव भी बढ़ गया है। हिमाचल प्रदेश के लोकनिर्माण मंत्री गुलाब सिंह ठाकुर ने बताया कि टनल के रखरखाव की व्यवस्था के साथ-साथ सरकार इसका विकल्प भी तलाश रही है। पहले इसे चौड़ा करने की योजना बनाई गई थी, लेकिन ऐसा संभव नहीं हो सका।
बाद में टनल के समानांतर दूसरी टनल बनाने की योजना बनी, लेकिन इस पर 119 करोड़ रुपए की भारी-भरकम लागत आ रही है। संजौली टनल का निर्माण 1850 में मेजर बिं्रग ने एक बड़ी पहाड़ी को काटकर करवाया था। इसे बनाने में हजारों कैदियों और मजदूरों का योगदान रहा है। 1910 के दशक में इसे चौड़ा किया गया।
टनल के इतिहास के बारे में ‘शिमला पास्ट एंड प्रेजेंट’ पुस्तक में जिक्र है। टनल में 1913 में बिजली लगाई गई। शुरू में इसमें दोहरा ट्रैफिक चलता था, लेकिन 1962 में हुई एक दुर्घटना के बाद से ट्रैफिक को वन वे कर दिया गया था।