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प्रधानमंत्री का वार, लेफ्ट का पलटवार

नई दिल्ली.प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सोमवार को भारत-अमेरिकी परमाणु करार पर लंबी चुप्पी तोड़ते हुए वामदलों की समर्थन वापसी की चेतावनी को दरकिनार कर दिया। साथ ही उन्होंने करार के क्रियान्वन से पहले संसद में जाने का इरादा जताया, लेकिन वामदलों ने अपने तेवर और सुर्ख करते हुए प्रधानमंत्री पर देश को धोखा देने का आरोप लगाया तथा चेताया कि करार पर सरकार आगे बढ़ेगी तो समर्थन वापस ले लिया जाएगा।

प्रधानमंत्री ने कुछ पत्रकारों से बातचीत में सरकार को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) व परमाणु आपूर्ति समूह के साथ समझौते की प्रक्रिया पूरी करने के लिए मौका देने की जरूरत बताई। उनके मुताबिक, जैसे ही यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी, फिर इसे हम संसद के सामने रखेंगे।

माकपा, भाकपा, आरएसपी तथा फॉरवार्ड ब्लॉक की साझा राय यही रही कि प्रधानमंत्री के बयान में कोई नई बात नहीं है। वे आईएईए तथा एनएसजी से बातचीत की प्रक्रिया पूरी करने की वकालत करके संसद के सामने पहले से तय फैसले को परोसने की तैयारी कर हैं। सिंह का बयान आने के बाद माकपा महासचिव प्रकाश करात ने कहा, ‘इसमें नया कुछ नहीं है। हमारे पोलित ब्यूरो का रवैया काफी साफ है।’ माकपा पोलित ब्यूरो के सदस्य सीताराम येचुरी ने कहा, ‘यदि वे आईएईए के साथ रक्षा उपाय समझौता करने की औपचारिकता पर आगे बढ़े तो हम समर्थन वापस लेने का पोलित ब्यूरो का फैसला लागू करेंगे।’

भाकपा नेता एबी वर्धन तथा शमीम फैजी ने कहा, ‘प्रधानमंत्री देश को धोखा देने की कोशिश कर रहे हैं क्योंकि आईएईए से रुके हुए मसौदे पर हस्ताक्षर के बाद भारत की कोई भूमिका नहीं रहेगी।’

दिल्ली में भाकपा, आरएसपी तथा फॉरवार्ड ब्लॉक के वरिष्ठ नेता तीन जुलाई को अलग-अलग बैठक कर करार पर सरकार के आगे बढ़ने की दशा में अपनी अगली योजना को अंतिम रूप देंगे।

‘करार पर अक्टूबर-नवंबर में हुई समन्वय समिति की बैठक में सरकार ने जो कुछ बताया वह पूरा सच बयान नहीं करता। बैठक में यह नहीं बताया गया कि आईएईए के पास सरकार का जाना जरूरी है, जैसा कि अब बताया जा रहा है।’ - विमान बोस, माकपा पोलित ब्यूरो सदस्य





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