अति क्रिकेट को लेकर एक बार फिर मामला गरमाने लगा है। इस बार एशिया कप के कार्यक्रम को लेकर टीम इंडिया के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने आवाज उठाई है। उन्होंने साफ-साफ कहा कि लगातार दो दिन में दो मैच खेलने से खेल प्रभावित हो रहा है।
भारत को लीग मैच में हांगकांग के साथ खेलने के अगले दिन पाकिस्तान से खेलना पड़ा था। अब सुपर-4 में 2 जुलाई को पाकिस्तान व 3 जुलाई को श्रीलंका के खिलाफ उसे खेलना है। धोनी के इस तर्क का टेस्ट कप्तान अनिल कुंबले ने भी समर्थन किया है। इस मामले में खिलाड़ियों का एक मत होना स्वाभाविक ही है।
धोनी ने तो सिर्फ एशिया कप को लेकर टिप्पणी की है लेकिन यह सचाई है कि क्रिकेटरों का अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम इतना अधिक व्यस्त हो गया है कि इंग्लैंड के केविन पीटरसन ने तो समय से पहले कैरियर खत्म होने की आशंका व्यक्त की है। पीटरसन से पहले स्टीव वॉ, रिकी पोंटिंग, सचिन तेंडुलकर व राहुल द्रविड़ भी अति क्रिकेट का विरोध कर चुके हैं।
ऐसे में धोनी ने अगर विरोध जताया है तो इसमें बीसीसीआई की ओर से उग्र प्रतिक्रिया समझ से परे है। बीसीसीआई के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने सीधे ही कह दिया कि आराम करना हो तो करें सभी खिलाड़ियों के विकल्प मौजूद हैं।
शुक्ला शायद यह नहीं जानते कि सचिन का कोई विकल्प नहीं हो सकता उसी प्रकार धोनी, युवराज सिंह, वीरेंद्र सहवाग, गौतम गंभीर के बिना कोई मैच जीतना कितना मुश्किल है। शुक्ला के धमकीनुमा बयान की इसलिए कोई अहमियत नहीं है क्योंकि यह बयान बीसीसीआई सचिव निरंजन शाह या अध्यक्ष शरद पवार की ओर से नहीं आया है। क्या वे यह नहीं जानते कि खिलाड़ियों को नाराज कर कोई जंग नहीं जीती जा सकती है। खिलाड़ी कोई बंदर तो है नहीं कि डुगडुगी बजाई और वे नाचना शुरु कर दें।
ज्यादा क्रिकेट से फिटनेस प्रभावित होने की सबसे अधिक चिंता होती है। अति क्रिकेट ने कई खिलाड़ियों के पारिवारिक जीवन को भी प्रभावित किया है। राष्ट्र की ओर से खेलना हर कोई अपनी शान समझता है। हर खिलाड़ी की कोशिश 100 प्रतिशत देने की होती है लेकिन बीसीसीआई यदि खिलाड़ी के दर्द को नहीं समझेगी तो कौन समझेगा।
इस साल टेस्ट, वनडे व आईपीएल सहित अभी तक धोनी ब्रिग्रेड 35 से ज्यादा मैच खेल चुकी है। आने वाले महीनों में लगभग इतने ही वनडे व टेस्ट खेलने हैं। ऐसे में अति क्रिकेट का विरोध यदि कोई खिलाड़ी करे तो उसे धमकाना अतार्किक व्यवहार ही माना जाना चाहिए।
अति क्रिकेट के इस विवाद में सहीं कौन है कप्तान धोनी या फिर बीसीसीआई? क्या अपने ही कप्तान को बीसीसीआई को इस तरह धमकाना उचित है?अपने विचार लिख भेजें।