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किडनी के लिए भोपाल में तय होते थे रिश्ते

भोपाल. किडनी खरीदने और बेचने वाले के बीच रिश्ते तय करने के लिए भोपाल में फर्जी मतदाता परिचय पत्र तैयार होते थे। परिचय इस परिचय पत्र तथा अन्य दस्तावेजों को शपथ पत्र के साथ अस्पताल में जमा कर किडनी प्रत्यारोपण का काम होता था।

किडनी का अवैध कारोबार करने वाले गिरोह का एक साथी 27 वर्षीय राजेश सेन पीरगेट का रहने वाला है। बीकाम तक पढ़ा राजेश डाटा एंट्री आपरेटर का काम कर चुका है। उसे कंप्यूटर का खासा ज्ञान है।

राजेश सेन दो सौ रुपए में किसी भी व्यक्ति से मतदाता परिचय पत्र खरीदकर उसका होलमार्क निकाल लेता था। इसके बाद परिचय पत्र को स्कैन कर कोरल में नाम और पता बदलकर उसका प्रिंट निकालकर होलमार्क चिपका देता था। बाद में इसका लेमीनेशन हो जाता था। उसने कुछ परिचय पत्र सीडी में इकट्ठा कर रखे थे। कई बार उसने साइबर कैफे से भी इनके प्रिंट निकाले हैं। उसने अभी तक 18 परिचय पत्र तैयार करना बताया है।

राजेश को एक मतदाता परिचय पत्र तैयार करने के ढाई हजार रुपए मिलते थे। राजेश के पिता हरिनारायण सेन का पीरगेट के पास पीसीओ है। राजेश के मौसा राजेश सेन उज्जैन नगर निगम में संविदा कर्मचारी है। मौसा राजेश लोगों के फर्जी राशन कार्ड तैयार करता था। इनका एक साथी भय्यू इंदौर एमपीएसईबी से खाली बिजली बिल चोरी करके लाता था जिसमें पूरी जानकारी टाइप की जाती थी।

परिचय पत्र, राशनकार्ड और बिजली बिल में किडनी बेचने वाले का नाम पता एक जैसा होता था। इन दस्तावेजों के आधार पर शपथ पत्र तैयार कर किडनी बेचने वाले को खरीदने वाले का रिश्तेदार बताया जाता था। किडनी खरीदने और बेचने वाले के सरनेम एक जैसे होते थे। पुलिस ने राजेश से सीडी भी जब्त की है। इस पूरे काम को राजेंद्र नागर अंजाम देता था।

वहीं बताता था कि किस नाम और पते से राशनकार्ड, परिचय पत्र और बिजली का बिल तैयार होना है। उज्जैन पुलिस को इस बात के सबूत नहीं मिले है कि आरोपियों ने भोपाल से किसी की किडनी बेची हो। पुलिस इस गिरोह के दो साथियों गिरीश सोनी और विनोद पटेल को गुजरात से गिरफ्तार करके लाई है।





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