भोपाल. मध्यप्रदेश योजना मंडल के उपाध्यक्ष डॉ. सोमपाल शास्त्री ने सोमवार को अपने पद से त्यागपत्र दे दिया है। सूत्रों के मुताबिक संसद के आगामी चुनावों से दुबारा सक्रिय राजनीति में लौटने की गरज से उन्होंने इस्तीफा दिया है। राज्य सरकार की अनेक योजनाओं से वे अपनी असहमति जताते रहे हैं।
प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान के मुख्यमंत्री बनने के बाद डॉ. शास्त्री को मुख्यमंत्री का सलाहकार नियुक्त किया गया था। इसके बाद जून 2006 में राज्य योजना मंडल के उपाध्यक्ष का पद संभालने वाले डॉ. शास्त्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में केंद्रीय कृषि मंत्री और योजना आयोग के सदस्य रह चुके हैं।
वे पूर्व केंद्रीय मंत्री अजीत सिंह को हराकर बागपत सीट से संसद में पहुंचे थे। कृषि और उसके अर्थशास्त्र में पारंगत डॉ. शास्त्री खुद भी हरियाणा के समृद्ध किसान हैं। उन्होंने 60 के दशक में हुई हरित क्रांति और कृषि पर कई किताबें भी लिखी हैं। डा. शास्त्री के नजदीकी सूत्रों ने इस्तीफे की पुष्टि की है। हालांकि वे खुद इस बारे में कुछ भी कहने से इंकार कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि वे सार्वजनिक कार्यक्रमों में राज्य की नीतियों का मुखर विरोध करते रहे हैं।
उन्होंने हाल में एक एनजीओ द्वारा पानी के व्यावसायीकरण के खिलाफ आयोजित कार्यशाला में भोपाल में नर्मदा लाने पर तल्ख टिप्पणी की थी। उनका कहना था कि इस परियोजना पर करोड़ों खर्च करने की बजाए सरकार को कम बजट में वाटरशेड विकसित करना चाहिए। वे रासायनिक खाद, दवाओं और कीटनाशकों पर टिकी मुनाफा केंद्रित आधुनिक खेती पर भी अपने विचार प्रकट करते रहे हैं।