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आडवाणी ऐलान: अमरनाथ चुनावी मुद्दा

नई दिल्ली/भोपाल.advani एक बार फिर भाजपा ने हिंदू कार्ड खेल दिया है। इस बार खैवनहार बनाया है बाबा अमरनाथ को। श्राइन बोर्ड विवाद, अफजल को फांसी में हो रही देरी और रामसेतु मामले पर यूपीए को चुनावों में घेरने की रणनीति का खुलासा सोमवार को भोपाल में लालकृष्ण आडवाणी ने किया।

अमरनाथ श्राइन बोर्ड से भूमि वापस लेने के जम्मू-कश्मीर सरकार के फैसले के खिलाफ भाजपा देशभर में व्यापक मुहिम चलाएगी। इस आंदोलन की रूपरेखा तय करने के लिए पार्टी प्रमुख राजनाथ सिंह ने मंगलवार को वरिष्ठ नेताओं की भाजपा मुख्यालय में बैठक बुलाई है। इस बीच, लालकृष्ण आडवाणी समेत कई अन्य नेताओं ने साफ कह दिया है कि यह आगामी चुनावों में प्रमुख मुद्दा बनेगा।

रणनीति तय: एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा कि भूमि मामले को यात्रियों की सुविधा से जोड़कर उठाया जाएगा, लेकिन किसी समुदाय विशेष को निशाना बनाने की भाजपा की रणनीति नहीं होगी। पार्टी की कोशिश होगी कि यूपीए ने सच्चर कमेटी समेत तुष्टिकरण को बढ़ावा देने वाले जितने नीतिगत फैसले लिए हैं, उन सब को उछाला जाए। भाजपा के एक प्रमुख रणनीतिकार ने माना कि हिंदू बहुल जम्मू संभाग में इस मुद्दे के गरमाने से भाजपा की स्थिति कई गुना बेहतर होने की संभावनाएं हैं।

आडवाणी के आरोप : भोपाल में सोमवार को आडवाणी ने इस विवाद के लिए सीधे केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नीत यूपीए सरकार ने तीन मौकों पर कट्टरपंथियों व सांप्रदायिक ताकतों के आगे घुटने टेके हैं।

पहला मौका रामसेतु मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में दिया गया विवादास्पद हलफनामा, दूसरा वोट बैंक को देखते हुए संसद हमले के दोषी अफजल गुरु को फांसी न देना और अब अमरनाथ श्राइन बोर्ड को दी गई जमीन का वापस लिया जाना।

उलेमा अब क्यों हैं खामोश : लोकसभा में भाजपा के उपनेता विजय कुमार मल्होत्रा ने साफ किया कि मुस्लिम तुष्टिकरण के साथ श्राइन बोर्ड भूमि विवाद भाजपा के चुनावी मुद्दों में काफी अहम होगा।

महासचिव विनय कटियार ने मुस्लिम उलेमाओं को निशाने पर लेते हुए कहा कि जो धर्मगुरु हर छोटे-बड़े मामले में फतवे जारी करते हैं वे आज खामोश क्यों बैठे हैं? उन्होंने धर्मनिरपेक्ष कहे जाने वाले दलों पर सवालिया निशान लगाते हुए कहा कि सांप्रदायिकता का आरोप केवल हिंदुओं पर ही क्यों मढ़ा जाता है?

साधु-संतों का सहारा!
राजेश सिन्हा. भोपाल .

आडवाणी की जीवनी ‘मेरा देश, मेरा जीवन’ के यहां सोमवार को हुए लोकार्पण समारोह में श्रीश्री रविशंकर और बाबा रामदेव की उपस्थिति से उन रिपोर्टे को बल मिला है कि भाजपा साधु-संतों को संघ समर्थित कार्यक्रमों में शामिल कर उनकी सेवाओं का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए कर रही है।

हालांकि आडवाणी और बाबा रामदेव दोनों ने इस कार्यक्रम को व्यक्तिगत मामला बताया। जब आडवाणी से पूछा गया कि इन दोनों गुरुओं की कार्यक्रम में उपस्थिति का कोई राजनीतिक महत्व है तो उन्होंने कहा, ‘मैंने पुस्तक में बताया है कि मुझे धार्मिक और आध्यात्मिक गुरुओं से मिलना पसंद है। वे (श्री श्री रविशंकर और बाबा रामदेव) यहां मेरे निजी अनुरोध पर आए। इसका कोई राजनीतिक कारण नहीं है।’

बाबा रामदेव के मुताबिक, यह कोई राजनीतिक कार्यक्रम नहीं था और वे किसी नेता या पार्टी को अछूत नहीं मानते। जब आडवाणी ने लोकार्पण कार्यक्रम के मौके पर आशीर्वाद देने का उनसे आग्रह किया तो वे इसमें आने को राजी हो गए। यह पूछने पर कि यदि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी उन्हें बुलाएं तो क्या वे जाएंगे तो बाबा रामदेव ने कहा कि सोनिया ‘देश की बहू’ हैं और उनसे मिलने में उन्हें कोई परेशानी नहीं है।





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