नीमच. बुलंद हौसलों के आगे शारीरिक कमजोरियां भी अक्सर छिप जाती हैं। यहां के खुशाल शर्मा (11) ने इस बात को भली-भांति साबित किया है। ब्रेन ट्यूमर के कारण आंखों की रोशनी गंवाने वाले खुशाल की याददाश्त इतनी तेज है कि वह पलक झपकते ही 100 साल तक पुराने कैलेंडरों की तारीख और दिन बता देता है। गणित में तेज खुशाल की तमन्ना इंजीनियर बनने की है।
ब्रेन ट्यूमर के कारण खुशाल चलने-फिरने के लिए भी दूसरों का मोहताजा हो गया था। इसके बावजूद उसने इसे चुनौती के रूप में स्वीकार किया और कुछ करने की ठानी। उसने ब्रेल लिपि सीखी, साथ ही गणित का लगातार अभ्यास किया।
तीन साल में वह हिंदी, अंग्रेजी लिखने और बोलने में माहिर हो गया। अब तो चाहे गणित का सवाल हो या १क्क् साल का कैलेंडर, पलक झपकते ही वह सवालों के जवाब दे देता है। उसे 100 देशों के नाम भी याद हैं।
बुलंद हौसलों की मिसाल
11 साल का खुशाल ब्रेन ट्यूमर के कारण आंखों रोशनी गंवा चुका है, साथ ही चलने-फिरने से भी मोहताज है। बावजूद वह दूसरों के लिए एक मिसाल है। गणित में माहिर खुशाल का सपना इंजीनियर बनने का है।
परिजनों की प्रेरणा
खुशाल की बढ़ती रुचि को देखते हुए माता-पिता उसे निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। पिता राजकुमार शर्मा कहते हैं कि बेटे की आंखों की रोशनी चली जाने के बाद सभी पहले तो बहुत निराश हुए, लेकिन उसके आगे बढ़ने की तमन्नाओं ने हमारी जिंदगी रोशन कर दी है।