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दूसरे दिन भी बेबस रहे यात्री

इंदौर. strike लगातार दूसरे दिन प्रदेशव्यापी हड़ताल से तीनों स्टैंड से एक भी अनुबंधित या निजी बस नहीं चली। कई यात्रियों ने स्टैंड पर ही रात गुजारी। सरवटे बस स्टैंड पर गरीब यात्रियों के लिए बस संचालकों और कर्मचारियों ने मिलकर नि:शुल्क पूड़ी-सब्जी की व्यवस्था की। इस बीच आरटीओ ने आज बस संचालकों की यूनियन के पदाधिकारियों को परिवहन मंत्री से चर्चा करने के लिए भोपाल भेजा।

आरटीओ गिरीशमोहन पाठक सुबह 11 बजे सरवटे बस स्टैंड पर पहुंचे और अनुबंधित बस एसोसिएशन संघर्ष समिति के अध्यक्ष गोविंद शर्मा सहित अन्य यूनियन पदाधिकारियों को बुलाकर परिवहन मंत्री का संदेश सुनाया।

श्री शर्मा ने बताया इसके बाद सभी पदाधिकारी भोपाल रवाना हुए। सरवटे बस स्टैंड से चलने वाली गुजरात, राजस्थान व महाराष्ट्र की 55 बसों में से एक भी नहीं चली जबकि हड़ताल के कारण गंगवाल बस स्टैंड पर शनिवार से खड़ी राजस्थान डिपो की अंतरप्रांतीय बस रविवार रात करीब 12 बजे बिना बताए रवाना हो गई।

स्टैंड प्रबंधक महेश सातोड़िया ने इसकी पुष्टि की। बसें नहीं चलने से जहां छोटी लाइन की ट्रेनों में पैर रखने की भी जगह नहीं थी, वहीं टैक्सी वालों ने इंदौर-भोपाल चलने वाली इंडिका के प्रत्येक यात्री से मनमानी वसूली की। संघर्ष समिति के अध्यक्ष श्री शर्मा ने हड़ताल बुधवार को भी रहेगी।

जब यात्री ने रुपए कम करने के लिए कहा तो 400 रुपए सवारी के हिसाब से ले गए। इसी तरह क्वालिस वाले 300-400 रुपए में ले गए। ग्वालियर से परिवार सहित आए आर.जी. पावल ने बताया स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत हूं और ड्यूटी पर उमरबन (धामनोद के पास) जाना है। बसों की हड़ताल है और टैक्सी वाले धामनोद तक के चार लोगों के 1400 रुपए मांग रहे हैं जबकि किराया प्रति व्यक्ति 55 रुपए है।

कल से ट्रांसपोर्टर व ट्रक संचालक भी हड़ताल पर
भाड़ा बढ़ाने की मांग को लेकर बुधवार से ट्रांसपोर्टर व ट्रक संचालक भी हड़ताल पर रहेंगे। सोमवार को हुई बैठक में हड़ताल के संबंध में निर्णय लिया गया। म.प्र. ट्रांसपोर्ट महासंघ के अध्यक्ष सरदार हरिसिंह और उपाध्यक्ष संजीव अरोरा ने बताया हमारा राज्य सरकार से आग्रह था कि वह पेट्रोल व डीजल के दामों में कमी लाए। बुधवार को परिवहन मंत्री हिम्मत कोठारी का पुतला ज जलाया जाएगा।

अन्य प्रदेश सरकारों की तरह ही वह भी पेट्रोल व डीजल पर लगने वाला टैक्स कम कर दे। बढ़ती महंगाई को देखते हुए हमने सरकार से भाड़ा बढ़ाने की मांग भी की है। साथ ही कमीशन एजेंटों से साढ़े तेरह प्रतिशत कमीशन लेने का विरोध किया है किंतु सरकार इस ओर ध्यान नहीं दे रही जिसके चलते हमें हड़ताल पर जाने का निर्णय लेना पड़ा।

ट्रांसपोर्टर राजीव आनंद का कहना है सरकार खुद के फायदे की सभी बातें देखती है किंतु जब हम लोग कुछ मांगें रखते हैं तो सुनने का नाम ही नहीं लेती। यही कारण है कि हमें हड़ताल पर जाना पड़ रहा है।





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