मुंबई.
महंगी रीयल इस्टेट, परियोजनाओं के टलने, मामूली लाभ के मार्जिन और कड़ी प्रतियोगिता ने संगठित रिटेलरों का भी जीना मुश्किल कर दिया है। महंगाई की मार जल्दी ही रिटेलरों पर दिखाई दे सकती है। लोग महंगाई की स्थिति में खरीदी घटा सकते हैं। उद्योग में भी माना जा रहा है कि कठिन परिस्थितियां आने वाली हैं।
हाइपरसिटी रिटेल के एंड्रू लीवरमोर का कहना है कि जिन कंपनियों का कामकाज मंदा चल रहा है और जो घाटे में हैं, उनके लिए कठिन समय आ रहा है। विश्लेषक अनिरुद्ध दत्ता और प्रखर शर्मा का कहना है कि छोटे रिटेलरों को भी अपने कारोबार बेचने पड़ सकते हैं। त्रिनेत्रा और अदानी समूह जैसी बड़ी कंपनियों ने कारोबार बेचे हैं।
शापर्स स्टाप के प्रबंधन का ख्याल है कि जो रिटेलर मुनाफे में नहीं है और उनका आकार 15-20 करोड़ रुपए का है तो वे बाजार से बाहर हो सकते हैं। किराया और लागत बढ़ रही हैं। वधावन होल्डिंग्स के वाइस प्रेसीडेंट श्रीनाथ श्रीधरन का मानना है कि किसी के लिए चार स्टोर के सहारा उद्योग में टिकना मुश्किल है और प्रतिस्पर्धा कम नही है।
मुश्किल
छोटे और घाटे में चल रहे रिटेलरों को व्यवसाय से बाहर होने का समय नजदीक
बड़े स्टोरों के लिए मुश्किल समय आने वाला है
कामकाज का आकार अब निर्णायक होगा। कीमतें सही रखना होंगी।
विस्तार की योजना भी तैयार
एजेंसी. नई दिल्ली.एक तरफ महंगाई के कारण कमजोर रिटेलरों के व्यवसाय से बाहर होने की आशंकाएं जाहिर की जा रही हैं, दूसरी तरफ बिग बाजार से जैसे रिटेलर विस्तार की योजना बना रहे हैं। बिग बाजार साल के अंत तक 61 नए स्टोर खोलने की योजना बना रहा है। वह इसके जरिये 5000 करोड़ तक कारोबार पहुंचाना चाहता है।
बेनेटन के 20 स्टोरइटैलियन कपड़ा कंपनी बेनेटन का कहना है कि वह भारत में दूसरे व तीसरे दर्जे के शहरों में 20 नए स्टोर खोलने वाली है।