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‘तकनीकी शिक्षा का लाभ गांवों तक पहुंचाएं’

ग्वालियर. महामहिम राष्ट्रपति प्रतिभा-देवीसिंह पाटिल ने गांवों के समग्र विकास के लिए तकनीकी शिक्षा का लाभ गांवों तक पहुंचाने की बात कही है। वे सोमवार को यहां माधव प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान संस्थान के स्वर्ण जयंती समारोह को संबोधित कर रही थीं। समारोह की अध्यक्षता संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने की। विशेष अतिथि के रूप में प्रदेश के खनिज, संस्कृति एवं जनसंपर्क मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा मौजूद थे।

तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में दिये गये योगदान के लिए एमआईटीएस ग्वालियर की सराहना करते हुए महामहिम ने संस्था के शिक्षकों से अपेक्षा की कि वे छात्रों को ऐसी शिक्षा दें, जिससे वे राष्ट्र की उन्नति के लिए समर्पित होकर कार्य कर सकें।

उन्होंने कहा कि देश के इंजीनियर अगर गांवों में जाएंगे तो दो लाभ होंगे। एक तो वे गांवों की जरूरतों को समझने के साथ वहां की समस्याओं से रू-ब-रू हो सकेंगे और दूसरे वे गांवों में सामाजिक चेतना पैदा करने में भी मददगार बन सकेंगे।

चुनौतियों के लिए खुद को तैयार करें
महामहिम राष्ट्रपति ने कहा कि देश में आजादी के बाद से स्कूल, कालेज, सड़क, सिंचाई, कृषि और औद्योगिक संरचना के विकास आदि में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। इसके बाद भी भविष्य में इस दिशा में हमें और अधिक प्रयास करने की जरूरत है। इसके लिए दो महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर ध्यान देना होगा। एक तो इंजीनियरिंग संस्थान भविष्य की चुनौतियों का सामना कैसे करें? और दूसरे विद्यार्थी अपने आपको भविष्य के लिए किस तरह से तैयार करें।

महामहिम ने कहा कि देश में साढ़े तीन हजार इंजीनियरिंग कालेज हैं। इनमें हर वर्ष साढ़े चार लाख इंजीनियर तैयार होते हैं इसके बावजूद देश में हर वर्ष 70 हजार सिविल इंजीनियरों की जरूरत महसूस की जा रही है। एक तरफ 39 फीसदी स्नातक इंजीनियरों को ही नौकरी मिल पा रही है तो दूसरी तरफ स्थिति यह है कि अनेक औद्योगिक घरानों को अच्छे इंजीनियर ही नहीं मिल पा रहे हैं।

यह स्थिति बेहद विसंगतिपूर्ण है। इससे निपटने के लिए शिक्षण संस्थानों को प्रशिक्षण विधियों और पाठ्यक्रमों को उन्नत करने की जरूरत है। प्रासंगिक पाठ्यक्रम के निर्माण में नये उद्योग और अकादमिक संस्थाओं के बीच विचार विमर्श उपयोगी साबित हो सकता है।

ज्ञान आधारित शिक्षा को बढ़ावा मिले : सिंधिया
समारोह की अध्यक्षता कर रहे केंद्रीय राज्य मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि समाज में ज्ञान आधारित शिक्षा की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भारत सूचना और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अग्रणी है। उन्होंने कहा कि एमआईटीएस जैसी संस्था राष्ट्र निर्माण और ज्ञान के प्रसार में अपनी सशक्त भूमिका निभाती रहेगी और देश के लिए कुशल इंजीनियर तैयार करती रहेगी।

देश का शिक्षा स्तर सुधरा : शर्मा
विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित संस्कृति एवं जनसंपर्क मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने कहा कि देश में शिक्षा का स्तर सुधरा है, जिसके कारण प्रतिभाओं का पलायन रुका है। देश तरक्की कर रहा है और विश्व का सिरमौर बनने की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने कहा कि एमआईटीएस जैसी संस्था प्रतिभाओं को आगे लाने के प्रयास कर रही हैं, यह बड़ी बात है।

एमआईटीएस पर डाक टिकट जारी
महामहिम राष्ट्रपति ने इस मौके पर एमआईटीएस पर केंद्रित पांच रुपए मूल्य का डाक टिकट जारी किया। इसके साथ ही स्मारिका का विमोचन भी किया। आरंभ में स्वागत भाषण संस्थान की शिक्षा समिति के सचिव रमेश अग्रवाल ने और आभार प्रदर्शन प्रशासनिक एवं वित्तीय अधिकारी प्रो. वायपी सिंह ने किया।

समारोह में राज्यपाल डा. बलराम जाखड़, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश के तकनीकी शिक्षा मंत्री डा. नागेन्द्र सिंह को भी भाग लेना था पर ये तीनों ही नहीं आये। मुख्यमंत्री की ओर से संस्कृति मंत्री डा. लक्ष्मीकांत शर्मा ने महामहिम का अभिवादन किया।





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