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Madhya Pradesh
Gwalior Gwalior ग्वालियर.
राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल को देखने हजारों शहरवासी एमआईटीएस पहुंचे। सुबह 11.25 बजे मंच पर पहुंची देश की प्रथम महिला का स्वागत शहरवासियों ने तालियां बजाकर किया। कार्यक्रम की शुरुआत व समापन राष्ट्रधुन से हुई।
राष्ट्रपति ने संस्थान के पूर्व प्राचार्य व पूर्व छात्रों का स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। संस्थान के 50 साल पूरे होने पर एमआईटीएस आईं राष्ट्रपति को देखने व सुनने के लिए सुबह नौ बजे से ही लोगों का पहुंचाना शुरू हो गया था।
साढ़े दस बजे तक 5000 की क्षमता वाला पंडाल पूरा भर गया, फिर भी आने वालों का सिलसिला श्रीमती पाटिल के आने तक चलता रहा। आगंतुकों के लिए अतिरिक्त कुर्सियां लगाईं गई लेकिन जब वे भी भर गईं तो महिलाएं व पुरुषों ने नीचे बैठकर राष्ट्रपति का भाषण का सुना।
इनका हुआ सम्मान
प्रो.डीपी चक्रवती पूर्व प्राचार्य, प्रो.कांतिलाल देवजी शर्मा पूर्व प्राचार्य, प्रो.पीएन विजयवर्गीय, सियाचीन ग्लेशियर वार में हिस्सा ले चुके मेजर जनरल क्रांति चक्र एसएस शर्मा, पूर्व छात्र व एनआरआई (यूएसए) राधे एस गुप्ता, पूर्व छात्र व प्रेसीडेंट वल्र्ड आपरेटर आफ न्यूक्लीयर डा श्रेयांस कुमार जैन, पूर्व छात्र व आईएएस संजय दुबे, पूर्व छात्र एस अग्रवाल।
डाक टिकट व स्मारिका का विमोचन
एमआईटीएस के 50 साल पूरे होने पर राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने डाक टिकट व संस्थान की स्मारिका का विमोचन किया। डाक टिकट में संस्थान के भवन को दिखाया गया है।
बोर्ड मेम्बर ने की अगवानी
एमआईटीएस में पहुंचीं राष्ट्रपति की आगवानी संस्थान की सोसायटी के सचिव रमेश अग्रवाल, बोर्ड मेम्बर अनूप सिंह, डीपी अग्रवाल, पीए केशवानी, एके बाजोरिया व वित्त एवं प्रशासनिक प्रभारी प्रो.वायपी सिंह ने की। आयोजन की व्यवस्था रजिस्ट्रार डा. ओपी पालीवाल, प्रो.आरके पंडित, प्रो.आलोक शर्मा के अलावा गजानन पोफली, आरएस यादव, शैलेन्द्र भदौरिया आदि स्टाफ ने देखी।
भोजन पर टूटे
कार्यक्रम खत्म होने के बाद मंच से भोजन का आमंत्रण दिया गया। आमंत्रण का एनाउंस होते ही लोग भोजन स्थल पर टूट पड़े। टेबलों को गिराकर तोड़ दिया गया। स्टालों पर भीड़ होने व्यवस्था ध्वस्त हो गई। संस्थान का स्टाफ व छात्र एक जगह खड़े होकर देखते रहे।
झलकियां
- राष्ट्रपति के साथ आए फोटो ग्राफर को पंडाल में मौजूद टीआई ने फोटो खींचने से मना कर दिया। इसको लेकर कुछ विवाद भी हुआ।
- कई लोगों ने धूप में खड़े होकर राष्ट्रपति को सुना।
- प्रेस बाक्स में कई बार व्यवधान आया। वीवीआईपी का कार्ड लेकर आए लोग प्रेस की कुर्सियों पर बैठ गए।
- राष्ट्रपति के काफिले के साथ आए वरिष्ठ अधिकारियों के लिए आगे आरक्षित कुर्सियों पर महिला नेत्रियां जमी रहीं। उनसे उठने का आग्रह किया गया लेकिन वे नहीं उठीं।
- संचालनकर्ता स्मृति चिह्न को स्मारिका बताती रहीं।