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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur बिलासपुर. जिला पंचायत की सहकारिता एवं उद्योग समिति की सोमवार को हुई बैठक में मुख्यमंत्री खाद्यान्न योजना के अंतर्गत 3 रुपए में गरीबों को प्रदान किए जाने वाले चावल की कालाबाजारी के मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ।
चावल एवं खाद की कालाबाजारी के मुद्दे पर सभापति अंजना मुलकुलवार ने 5 एवं 7 जून को शिकायत से जुड़े सोसाइटियों की जांच करने का एलान किया है। जांच में अधिकारियों के साथ जिला पंचायत के सदस्य भी शामिल रहेंगे।
बैठक शुरू होते ही भाजपा की सुशीला सूर्यवंशी ने सेलर की सहकारी समिति द्वारा मुख्यमंत्री खाद्यान्न योजना के चावल की 10 रुपए प्रति किलो की दर पर कालाबाजारी करने की शिकायत की। उन्होंने इस मामले को गंभीरता से लेकर जांच कराने की मांग की।
कांग्रेस की अंबालिका साहू का कहना था कि पीपरलोड, हिंछापुर सेवा सहकारी समिति में डीएपी सुपर फास्फेट की कमी बताकर उसकी कालाबाजारी की जा रही है। सुपर फास्फेट की निर्धारित दर 186 रुपए है, परंतु उसे 210 से लेकर 230 रुपए तक में बेचा जा रहा है। पथरिया, सरगांव में खाद की कमी तथा सोसाइटियों में ताला लटकने की शिकायतें मिली है।
अध्यक्षता करते हुए सभापति अंजना मुलकुलवार ने रासायनिक खाद की तुलना में बर्मी कम्पोस्ट खाद को अधिक फायदेमंद बताते हुए किसानों में इसके प्रचार-प्रसार पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इस खाद में मिलावट तथा भूमि की उवर्रक क्षमता समाप्त होने का खतरा नहीं रहता।
बैंक वालों के खिलाफ गुस्सा फूटा
खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग की विभिन्न स्कीमों में अधिकृत बैंकों द्वारा हितग्राहियों को ऋण देने के बजाए सिर्फ अनुदान की राशि बांटने की शिकायत पर सदस्यों का गुस्सा फूट पड़ा। सहायक संचालक लाखन सिंह ने स्पष्ट किया कि चोरभट्ठी की अनिता सूर्यवंशी व उनकी सहेली महिलाओं को 27 हजार रुपए के स्वीकृत बैंक ऋण के बजाए स्टेट बैंक की कृषि विकास शाखा ने 3 हजार की सिलाई मशीन 5 हजार में तथा 8 हजार का निम्न क्वालिटी का कपड़ा दिलाकर 50 फीसदी अनुदान का भुगतान कर लिया।
वहीं शेष 50 फीसदी रकम का भुगतान नहीं किया। इसी प्रकार छतौना की ईश्वरीय बाई, दीपमाला, सीताबाई एवं स्वर्णलता तथा चोरभट्ठी की शीतला, सुनीता िसंह, चंद्रलता, सुखबाई, जीमत बाई को लोन की राशि रोककर शासन के अनुदान की राशि का भुगतान किया गया।
सदस्यों की आम शिकायत थी कि गरीब वर्ग के लोगों को सामान्य रूप से कम राशि के ऋण(परिवार मूलक योजना) के बजाए मार्जिन मनी(उच्च वर्ग, अधिक रकम) के हितग्राहियों को ऋण देने में अधिक रुचि दिखाई जाती है।