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जायरीन से अटी हुजरों की छतें

अजमेर. झंडे की रस्म में शामिल होने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों के अतिरिक्त खासी तादाद में स्थानीय लोग भी पहुंचे। दरगाह परिसर में स्थित अकबरी मस्जिद, महफिल खाना, शाहजहांनी गेट, लंगर खाना, और संदल खाना गेट की छतों व हुजरों की छतें अकीदतमंद से अटी पड़ीं थीं।

महफिल खाने के सामने वाला दालान जायरीन से ठसाठस भरा था। इधर संदल खाने के पास और अहाता-ए-नूर में भी लोग जमा थे। झंडा चढ़ने के मंजर का गवाह बनने और अकीदत का इजहार करने के लिए दरगाह के आसपास की इमारतों पर भी खासी तादाद में लोग जमा थे। महिला अकीदतमंद और बच्चों की भीड़ झरोखे में खड़ी थी।

पुलिस और कर्मचारियों ने दिए धक्के
झंडे के जुलूस में पुलिसकर्मियों, आरएसी के जवानों और दरगाह कमेटी के सुरक्षाकर्मियों के रवैये से जायरीन में खासी नाराजगी थी। भीड़ को नियंत्रित करने के नाम पर जवानों और कर्मचारियों ने अकीदतमंदों को धक्के मारकर झंडे से दूर किया। इससे सैकड़ों जायरीन झंडा नहीं चूम पाए।

लंगर खाना गली में जुलूस की शुरुआत से पहले ही उन्होंने रास्ते के दोनों ओर घेरा बना कर अकीदतमंदों को बीच में आने से रोकने का प्रयास किया। अकीदत में डूबे कुछ जायरीन जब झंडे के पास जाने के लिए घेरा तोड़ने लगे तो गुस्साए कर्मचारियों ने जायरीन को पकड़-पकड़ कर दूर फेंक दिया।

इससे कुछ अकीदतमंद गिरते-गिरते बचे। जायरीन को धक्का देने में दरगाह कमेटी के कुछ कर्मचारी भी पीछे नहीं रहे। धक्कों से खफा अनेक जायरीन पुलिस, आरएसी व कमेटी कर्मचारियों से उलझ पड़े। यही हाल दरगाह परिसर में भी था।

अकबरी मस्जिद के सामने स्थित दालान में पुलिसकर्मियों ने लोगों को झंडे से दूर रखा और उन्हें धक्के लगाए। सहन चिराग के सामने खड़ी जायरीन की भीड़ को भी धक्के मार कर दूर हटाया गया।

..और झूमते रहे अकीदतमंद
बुलंद दरवाजे पर झंडा चढ़ाने के दौरान सहन चिराग के पास सीआरपीएफ के बैंडवादकों द्वारा बिखेरी जा रही सूफियाना कलामों की धुनों पर अकीदतमंद झूमते रहे।

नाजिम ने खुलवाया गेट
दरगाह नाजिम अहमद रजा ने बताया कि झंडे की रस्म के बाद परिसर में जायरीन की काफी भीड़ थी। लंगर खाना गेट लोगों को निकालने के लिए लगभग एक घंटे तक खोला गया। जायरीन के चले जाने के बाद इसे बंद करवा दिया गया। जरूरत के समय और गेटों को भी खोल दिया जाएगा।

लंगरखाना गेट खुला और बंद हो गया
दरगाह का लंगर खाना गेट सोमवार को झंडे की रस्म के बाद कुछ देर के लिए खोल दिया गया और जायरीन की निकासी के बाद वापस बंद कर दिया गया। उधर दूसरे बंद गेट खुलवाने की मांग को लेकर खुद्दाम-ए-ख्वाजा अंजुमन सैयदजादगान के दफ्तर एकत्रित हो गए।

झंडे की रस्म के बाद जायरीन की भीड़ को देखते हुए लंगर खाना गेट खोल दिया गया। गेट से भीड़ निकल जाने के बाद इसे वापस बंद करवा दिया गया। लंगरखाना गेट खुलने के बाद लोगों को आशा थी कि सोलहखंभा गेट भी खोल दिया जाएगा।

इस संबंध में अंजुमन सचिव सैयद महमूद मियां चिश्ती, सैयद मुनव्वर चिश्ती, पीर नफीस मियां चिश्ती आदि लोगों ने एडीएम सिटी स्नेहलता पंवार से बातचीत की और सोलहखंभा गेट भी खुलवाने की बात कही। पंवार ने अंजुमन पदाधिकारियों को बताया कि उन्होंने गेट खुलवाने का आदेश किसी को नहीं दिया है। बाद में अंजुमन पदाधिकारियों ने कलेक्टर से भी बात की।

बड़ा परचम उतारा, छोटा चढ़ा रहेगा
बुलंद दरवाजे पर चढ़ाया गया उर्स का बड़ा झंडा कुछ देर बाद उतार लिया गया। इसके स्थान पर छोटा नया झंडा बुलंद दरवाजे पर चढ़ा दिया गया। यह झंडा बड़े कुल की रस्म के बाद उतरेगा।

भीलवाड़ा से आए गौरी परिवार के सदस्य फखरुद्दीन गौरी ने बताया कि बड़ा झंडा पुराना और परंपरागत झंडा है। इस झंडे को अगले साल सुरक्षित रखने के लिए इसे कुछ देर बाद हटा लिया जाता है। हवा चलने से झंडा फट जाए, या गल जाए यह आशंका बनी रहती है। इसके स्थान पर छोटा नया झंडा चढ़ाया जाता है।

रात में हुई खिदमत
झंडा चढ़ने के साथ ही आस्ताने की खिदमत का वक्त भी बदल गया। सोमवार को रात 9 बजे आस्ताना शरीफ खिदमत के लिए बंद किया गया। हिजरी संवत के रबिउस्सानी महीने की 25 तारीख के साथ ही उर्स का झंडा चढ़ा दिया गया। दोपहर तीन बजे होने वाली खिदमत का वक्त बदल दिया गया।





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