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उर्स का परचम ‘बुलंद’

अजमेर. ursh ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह में आशिकान-ए-ख्वाजा के हुजूम की मौजूदगी में सोमवार को बुलंद दरवाजे पर उर्स का परचम चढ़ाया गया। इसी के साथ सूफी संत हजरत ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती के 796वें उर्स की अनौपचारिक शुरुआत हुई। धूमधाम से झंडे का जुलूस निकाला गया और तोप के गोले दागे गए। गरीब नवाज की मजार पर फूलों का नजराना पेश कर मुल्क में अमन और भाईचारे की मजबूती के लिए दुआ मांगी गई।

अस्र की नमाज के बाद दरगाह गेस्ट हाउस से धूमधाम से झंडे के जुलूस की शुरुआत हुई। बड़े पीर साहब की पहाड़ी से तोप के गोले दागे गए। जुलूस में सबसे आगे सीआरपीएफ के बैंडवादक सूफियाना कलाम की धुनें बिखेरते हुए चल रहे थे। उसके पीछे भीलवाड़ा के लाल मोहम्मद गौरी के परिवार के सदस्य झंडे को लेकर चल रहे थे।

झंडे के बीच आशिकान-ए-ख्वाजा का हुजूम ‘ख्वाजा का दामन नहीं छोड़ेंगे’,‘मेरा ख्वाजा हिंद का राजा’ और ‘नारा-ए-तकबीर अल्लाहु अकबर व नारा-ए-रिसालत या रसुलल्लाह’ लगाते हुए चल रहे थे।

दरगाह की शाही कव्वाल चौकी के सदस्य असरार हुसैन और साथी मनकबत के नजराने पेश करते हुए चल रहे थे। उनके पीछे गौरी परिवार के सदस्य फखरुद्दीन गौरी की अगुवाई में लोग मखमल की चादर और फूलों की टोकरी सिर पर अकीदत के साथ लेकर चल रहे थे। जायरीन से खचाखच भरी लंगरखाना गली के बीच से जुलूस को नला बाजार तक पहुंचने में लगभग आधा घंटा लग गया।

झंडे को चूमने के लिए आशिकान-ए-ख्वाजा में होड़ लगी हुई थी। फूल गली भी जायरीन से ठसाठस भरी हुई थी और लोग ख्वाजा के दर पर चढ़ाए जाने वाले झंडे को अकीदत से निहार रहे थे। अकीदत में डूबे लोग झंडे पर पुष्प वर्षा कर रहे थे और मालाएं चढ़ा रहे थे।

नला बाजार से होते हुए जुलूस जब निजामगेट पहुंचा, वहां पहले से ही मौजूद आशिकान-ए-ख्वाजा ने जोरदार स्वागत किया और झंडे को पकड़ने के लिए होड़ मच गई। अकबरी मस्जिद के सामने स्थित दालान होते हुए झंडे का जुलूस बुलंद दरवाजा पहुंचा। यहां परंपरागत तरीके से धूमधाम से झंडे को बुलंद दरवाजे पर चढ़ा दिया गया।

और उठे हजारों हाथ दुआ के लिए
बुलंद दरवाजे पर गौरी परिवार के सदस्यों के झंडा चढ़ाने के साथ ही लोगों के हाथ दुआ के लिए उठ गए। सैकड़ों लोगों ने मुल्क की खुशहाली और परिवार की समृद्धि के लिए दुआ की।

पेश किया अकीदत का नजराना
झंडे की रस्म अदा करने के बाद गौरी परिवार के सदस्य सिरों पर चादर और फूलों की टोकरी लिए हुए संदल खाना गेट से होते हुए आस्तना शरीफ पहुंचे। मजार शरीफ पर अकीदत का नजराना पेश किया और मुल्क में अमन व भाईचारे की मजबूती के लिए मन्नत मांगी। सैयद अबरार हुसैन ने फखरुद्दीन गौरी और परिवार के अन्य सदस्यों को जियारत कराई, दस्तारबंदी की और तबरुक भेंट किया।





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