जैसलमेर.
रिटायरमेंट की उम्र में लीलाधर ने दसवीं कक्षा पास की है। नगरपालिका में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी लीलाधर लाखेरा को शुरू से ही बाबू बनने की ख्वाहिश थी, लेकिन पारिवारिक परिस्थितियों के कारण वे दसवीं जमात तक पढ़ नहीं पाए थे। उनके दिल में यह इच्छा हमेशा जिंदा रही। आखिरकार उन्होंने इस बार भाग्य आजमाया। जैसे ही उन्हें पास होने की खबर मिली वे खुशी के मारे झूम उठे।
उन्होंने पालिका कार्यालय में मिठाई बांटी और बच्चों को साथ ले अपने रिश्तेदारों व मित्रों के साथ खुशी मनाने पहुंच गए। पचपन की उम्र में दसवीं पास करने पर हर कोई उनके हौसले की दाद दे रहा है। लीलाधर ने बताया कि 1968 में उन्होंने 9वीं कक्षा पास की थी।
आर्थिक स्थिति कमजोर होने से पढ़ाई छोड़ कर ठेला चलाना पड़ा। वे गली-गली घूमकर चूड़ियां बेचते थे। बाद में 1972 में नगरपालिका में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर नौकरी लग गई। वे काबिलियत के सहारे ऑफिस में क्लर्क का ही काम करते रहे। आखिरकार उन्होंने विधिवत क्लर्क बनने की ठान ली और 40 वर्ष बाद दसवीं कक्षा की परीक्षा दी। पहली बार में ही वे पास हो गए।