नई दिल्ली.
भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु करार पर यूपीए सरकार व वामदलों के आमने-सामने आ जाने के बाद राजधानी में नए राजनीतिक ध्रुवीकरण की कोशिशें तेज हो गई हैं।
जल्द आम चुनाव की संभावना के मद्देनजर करार को केंद्र में रखकर बाजियां चली जा रही हैं। खासकर समाजवादी पार्टी से मिश्रित संकेत मिलने के बाद सरकारी खेमे में कुछ राहत महसूस की जा रही है। लोकसभा में सपा के 39 सदस्य हैं।
माकपा महासचिव प्रकाश करात ने मंगलवार को अपना रुख दोहराते हुए कहा कि अगले हफ्ते जापान में हो रहे जी-8 सम्मेलन में प्रधानमंत्री की मौजूदगी इस बात का संकेत समझा जाएगा कि यूपीए सरकार करार पर आगे बढ़ने वाली है। यह 4 जुलाई को प्रस्तावित वामदलों की बैठक में समर्थन वापसी के फैसले का आधार बन सकता है।
करार पर तरह-तरह की अटकलों और संभावनाओं के बीच प्रधानमंत्री राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील से मिले। समझा जाता है 50 मिनट की इस मुलाकात में उनकी करार पर बने राजनीतिक गतिरोध पर चर्चा हुई।
राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव का समर्थन मिलने का भरोसा जताया। उन्होंने कहा, ‘मुलायम हमारे हैं और सरकार तथा करार दोनों बचे रहेंगे।’
इससे पहले, मौजूदा राजनीतिक हालात में मुख्य संकटमोचक की भूमिका निभाने में सक्षम मानी जा रही समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस के साथ नजदीकियां गहराने के संकेत दिए। यूएनपीए की 3 जुलाई को प्रस्तावित अहम बैठक में भाग लेने पहुंचे मुलायम ने कहा कि उनकी पार्टी का कोई राजनीतिक शत्रु नहीं है।
सपा नेता अमर सिंह ने पहले विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी और फिर माकपा नेताओं- प्रकाश करात और सीताराम येचुरी से मुलाकात की। इसके बाद सिंह ने बताया कि उन्होंने वाम नेताओं से सांप्रदायिक शक्तियों को मजबूत नहीं करने की अपील की।
मुलायम की कोशिश है कि तीसरे मोर्चे (यूएनपीए) के घटक दलों से चर्चा के बाद ही अपने पत्ते खोलें। फिर भी संभव है कि अपने-अपने राज्यों की परिस्थितियों के कारण यूएनपीए के घटकों-तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा), असम गण परिषद (अगप) तथा इंडियन नेशनल लोकदल को सपा की कांग्रेस से बढ़ती नजदीकियां नहीं सुहाएं। तेदेपा तथा अगप के लोकसभा में फिलहाल क्रमश: पांच और दो सदस्य हैं।
अमर सिंह के मुताबिक, समझौते के कुछ पहलुओं पर स्पष्टीकरण के लिए बुधवार को सपा नेताओं और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन की मुलाकात होगी। समझा जाता है कि इस बैठक के बाद सपा करार के पक्ष में स्टैंड ले सकती है।सपा की घोर विरोधी व कांग्रेस से समर्थन वापस लेने वाली बसपा की सर्वेसर्वा मायावती ने भी करार को मुस्लिम विरोधी बताकर एक तरह से वामदलों के प्रति अपना रुख साफ कर दिया।
उन्होंने अपने आवास पर मीडियाकर्मियों से वार्ता में कांग्रेस, भाजपा और सपा पर करारे हमले किए। उन्होंने भाजपा के साथ चुनाव पूर्व किसी गठबंधन की संभावना से इनकार किया।
शिवसेना ने ‘सामना’ में छपे संपादकीय में करार विरोधियों की आलोचना की, जिससे भाजपा के सामने भी असहज स्थिति पैदा हो गई। हालांकि सेना ने साफ किया कि इस मुद्दे पर एनडीए से अलग स्टैंड लेना उसके लिए मुश्किल होगा।
उथलपुथल भरा सप्ताह
1. तीसरे मोर्चे यूएनपीए की बैठक 3 जुलाई को रही है जिसमें सपा का रुख सामने आएगा। सरकार की निगाहे इस फैसले पर टिकी हैं क्योंकि वाम दलों के समर्थन वापस लेने पर मुलायम की पार्टी मददगार होगी।
2. इसी दिन भाकपा के केंद्रीय सचिव मंडल की बैठक हो रही है जबकि इसके अगले दिन चारों वाम दल एकजुट होकर यूपीए सरकार को समर्थन की समीक्षा करेंगे।
3. छह जुलाई से जापान में जी-8 की बैठक हो रही है जिसमें प्रधानमंत्री मनमोहन ¨सह और अमेरिकी राष्ट्रपति जार्ज बुश के बीच मुलाकात में डील पर भारत का रुख सामने आएगा।
4. यदि यूपीए सपा का समर्थन हासिल कर लेती है तो संभावना है कि आईएईए में 7 जुलाई को भारत फैसला कर लेगा।
कौन कहां?
कांग्रेस: करार पर आगे बढ़ने को बेकरार,
यूपीए के सहयोगी (खासकर राजद, द्रमुक व राकांपा): सरकार के साथ,
सपा: कांग्रेस से बढ़ती नजदीकियां,
वाम दल: कांग्रेस और करार विरोधी समूह के अगुवा,
बसपा: करार का साफ विरोध,
भाजपा: करार विरोधी तेवर,
यूएनपीए: तीन जुलाई का इंतजार।
सभी दलों ने शुरू कीं बाजियां खेलना
बेफिक्र प्रधानमंत्री
वामदलों की धमकियां रोज की बात हो गई हैं। सरकार पर न पहले संकट था और न अब है। यूपीए एकजुट है। रही बात करार की तो वो होकर ही रहेगा।
मनमोहन सिंह, पीएम
नए किंग मेकर
राजनीति में हमारा कोई शत्रु नहीं है। हमारा मकसद तो सांप्रदायिक ताकतों को कमजोर करना है। हमने कभी भी कांग्रेस को अछूत नहीं माना।
—मुलायम सिंह, सपा प्रमुख
अल्पसंख्यक कार्ड
एटमी करार मुस्लिम विरोधी है। अमेरिका से समझौता ईरान से सस्ती गैस की कीमत पर किया जा रहा है। मुस्लिम इससे खफा हैं।
—मायावती, बसपा सुप्रीमो