भोपाल.
परमाणु करार के मामले में लाल हो रहे वामपंथी दलों ने केंद्र की यूपीए सरकार से समर्थन वापसी की मियाद तय कर दी है। अखिल भारतीय हिन्द फारवर्ड ब्लाक के महासचिव एवं सांसद देवब्रत बिश्वास ने भास्कर से चर्चा में कहा कि चार जुलाई बैठक कर राष्ट्रपति को समर्थन वापसी की चिटठी सौंप दी जाएगी।
इससे पहले वामपंथी पार्टियों की समन्वय समिति की बैठक दिल्ली में होगी जबकि इससे पूर्व फारवर्ड ब्लाक की तीन जुलाई को बैठक भी आयोजित की गई।
श्री बिश्वास ने कहा कि प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह ने परमाणु करार पर आगे बढ़कर यूपीए के साझा कार्यक्रम का उल्लघंन किया है। वामपंथी पार्टियों के साथ कांग्रेस ने धोखा भी किया। परमाणु करार संबंधी सवाल के जबाव में उन्होंने कहा कि इस करार के पीछे अमरीका की मंशा हिन्दुस्तान को राजनीतिक-सामरिक गुट आर्थिक परिकल्पना है ताकि भारत की आजादी को अपने चंगुल में अमरीका ले सके।
मनमोहन सरकार पूरी तरह से अमरीका की नीति,स्वार्थ,को पूरी- पूरी मदद कर रही है। परमाणु उर्जा के बारे में भ्रम पैदा किया जा रहा है। कहा जा रहा है कि उर्जा की दृष्टि से देश के लिए आवश्यक है, जबकि हकीकत यह है कि परमाणु स्त्रोत से तीन प्रतिशत उर्जा आज भी मिल रही है, जबकि अमरीका के साथ करार होने के बाद वर्ष 2020 में 10 प्रतिशत उर्जा ही मिलेगी।
वे कहते इस मुद्दे का सामाजिक आडिट होना चाहिए। देश में जल विद्युत की भारत में कोई कमी नहीं है,जल विद्युत से 1रू 20 पैसे प्रति यूनिट खर्चा आयेगा, जबकि परमाणु ऊर्जा का खर्चा 5 रू प्रति यूनिट आएगा और महंगी बिजली कोई खरीद नहीं पाएगा। इससे पर्यावरण की हानि भी होगी। पूरे मामले में कापरेरेट घराना भी सक्रिय है। परमाणु करार पर चर्चा का दौर एनडीए सरकार ने शुरू किया था। इस मामले को मनमोहन सरकार ने आगे बढ़ाया है,जबकि देश में ुगरीबी,महंगाई,बेरोजगारी,भुखमरी बेरोजगारी बढ़ रही है।
श्री बिश्वास ने कहा कि देश की दो बडी पार्टिया कांग्रेस एवं भाजपा का रिमोर्ट बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हाथों में है, इन्हें आम आदमी से कोई लेना- देना नहीं है। पूरी तरह से यह पार्टियां बहुराष्ट्रीय कंपनियां के इशारों पर कार्य कर रही है। देश की संसद भी डील के खिलाफ है। अब समाजवाद क ा राग अलापने वाले दल भी परमाणु करार के पक्ष में आ गए ।
उन्होंने कहा कि वामपंथी पार्टियां किसी को डरा नहीं रही बल्कि देश को वास्तविकता से अवगत करा रही है। इसी प्रकार भाजपा का हिन्दुत्व भी जनता के सामने आ गया है,इसलिए राम मंदिर, रामसेतु का मुददा चुनाव में नहीं बन पाएगा।