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क्या बस्तर के थानों पर ताले लगा दूं

रायपुर. transfer तबादला सूची जारी होने के फौरन बाद पुलिस मुख्यालय में तबादला रुकवाने वालों की भीड़ उमड़ गई। कुछ अफसरों ने मंगलवार की शाम डीजीपी श्री रंजन को तबादला रुकवाने की अर्जी दी तो वे भड़क गए। उन्होंने यहां तक कह डाला कि जब कोई अपने सेवाकाल में एक या दो बार बस्तर नहीं जाना चाहता तो फिर वहां थाने खोलकर रखने का कोई अर्थ नहीं है।

बेहतर है कि सबको नक्सल इलाकों से वापस बुला लिया जाए और वहां थानों पर ताले लगा दिए जाएं। तबादला रद्द कराने वालों को बैरंग लौटाने के बाद डीजीपी ने पुलिस मुख्यालय में आला अफसरों की बैठक बुलाई। उन्होंने कहा कि स्थापना बोर्ड ने सारे आवेदनों और हालात पर विचार-विमर्श के बाद ही तबादला सूची जारी की है। और साफ कह दिया कि तबादले स्थापना बोर्ड ने तमाम हालात पर विचार-विमर्श के बाद किए हैं। जो लोग तबादला रुकवाने की कोशिश में लगे हैं, उन्हें हतोत्साहित किया जाए।

सूत्रों के अनुसार उन्होंने आईजी प्रशासन आरके विज को ये निर्देश भी दिए कि पिछले चार-पांच साल में तबादलों के बाद जो लोग नक्सल क्षेत्रों में नहीं गए और बाद में तबादले रुकवाने में कामयाब रहे, उनकी सूची भी बनाई जाए। अलबत्ता, जिन लोगों ने नक्सल इलाकों में खामोशी से चार्ज लिया और काम किया, उनके आवेदनों पर सहानुभूति से विचार किया जाए।

दैनिक भास्कर से डीजीपी ने यही कहा कि विभाग ने तबादलों पर सख्ती से अमल कराने का फैसला किया है। जो नहीं जाएंगे, माना जाएगा कि उन्होंने पुलिस महकमे का अनुशासन तोड़ा है। डीजीपी के इस रवैये से पुलिस महकमे में खलबली मच गई है। यह पहला मौका है जब तबादले रुकवाने वालों को विभाग ने निशाने पर लिया है।

पिछले चार-पांच साल के भीतर पुलिस महकमे में तबादले रुकवाने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ी है। खासकर, सिपाही से लेकर डीएसपी तक का बड़ा वर्ग बस्तर जाने के लिए तैयार नहीं होता। यही वजह है कि तबादला सूची जारी होने के फौरन बाद रुकवाने की धमाचौकड़ी शुरू हो जाती है। पिछले एक पखवाड़े में पुलिस स्थापना बोर्ड ने 400 से ज्यादा अफसरों के तबादले किए हैं। उसके बाद से ही तबादला रुकवाने के लिए कई अफसर पुलिस मुख्यालय से मंत्रालय तक दौड़ लगा रहे हैं।

आरटीओ वालों पर सबसे पहले गाज
डीजीपी श्री रंजन के निर्देश के फौरन बाद पुलिस मुख्यालय के प्रशासन विभाग ने उन 60 सिपाही-हवलदारों की सूची तैयार कर ली, जो आरटीओ से लौटने के बाद बस्तर नहीं गए और किसी तरह खुद को रायपुर या दुर्ग में अटैच कराने में सफल रहे। इस सूची में 8 हवलदार और बाकी सिपाही हैं। हफ्तेभर में सभी को निलंबित करने की तैयारी है।

दो-तीन दिन में ऐसे एएसआई, एसआई और इंस्पेक्टरों की सूची भी तैयार कर ली जाएगी। डीजीपी ने कहा कि कुछ अफसर ऐसे हैं जिन्होंने नक्सल इलाकों में आरटीओ बैरियरों पर तैनाती खुशी-खुशी काटी लेकिन जैसे ही उनका इन इलाकों में रूटीन तबादला हुआ, किसी ने दिल तो किसी ने अन्य बीमारी का सर्टिफिकेट पेश कर दिया। इन सबके खिलाफ कार्रवाई होगी।





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