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छग के लिए कांग्रेस बनाएगी कोआर्डिनेशन कमेटी

नई दिल्ली. छत्तीसगढ़ में नेताओं की आपसी खींचतान से बचने व सकारात्मक परिणामों के साथ चुनावी समर पार करने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने एक कोआर्डिनेशन कमेटी बनाने का निर्णय लिया है। कमेटी के कोआर्डिनेटर, प्रभारी महासचिव वी नारायण सामी होंगे।

कमेटी का काम योग्य प्रत्याशियों का चयन, अनुशासन, आपसी सांमजस्य व चुनावी रणनीति बनाना तथा गुटबाजी पर लगाम लगाना भी होगा। कमेटी बनने के बाद इसकी पहली मीटिंग सोनिया की मौजूदगी में इसी महीने दिल्ली में होगी। कांग्रेस के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोरा, पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी, पूर्व केन्द्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, अरविंद नेताम, पूर्व सांसद कमला मनहर, प्रदेश अध्यक्ष धनेन्द्र साहू, कार्यकारी अध्यक्ष चरणदास महंत व सत्यनारायण शर्मा कमेटी के सदस्य होंगे।

सूत्रों के मुताबिक सोनिया छत्तीसगढ़ को लेकर किसी भी तरह का चांस नहीं लेना चाहती तथा वहां फिर से सरकार बनाने के लिए वे केवल जीतने योग्य उम्मीद्वारों को ही टिकट देना चाहती हैं। कोआर्डिनेशन कमेटी उम्मीद्वारों के पैनलों पर गंभीरता से विचार करेगी और उनमें से नाम छांटकर आखिरी निर्णय के लिए सोनिया को भेजेगी।

सोनिया ने कोरबा सहित छत्तीसगढ़ में हुई अन्य अनुशासनहीनता की शिकायतों को भी गंभीरता से लिया है। कोआडर्िीनेशन कमेटी ऐसी घटनाओं को भी रोकने का काम करेगी तथा कमेटी में शामिल होने वाले सभी नेता अपने समर्थकों पर लगाम रखेंगे।

वीसी ने नाराजगी जाहिर की
विद्याचरण शुक्ल ने सोमवार को सोनिया गांधी से मुलाकात कर अपनी नाराजगी जाहिर की तथा अनुशासनहीनता व गुटबाजी के खतरे से आगाह भी किया। शुक्ल ने छत्तीसगढ़ की हाल की कुछ घटनाओं का हवाला देते हुए सोनिया को बताया कि कुछ वरिष्ठ नेता जानबूझकर अपने समर्थकों को उकसाकर हंगामा करा रहे हैं। हालांकि, उन्होंने सीधे तौर पर किसी का नाम नहीं लिया लेकिन ऐसी स्थिति में चुनाव जीतना मुश्किल बताया और लगाम लगाने के लिए कहा। सूत्रों के अनुसार शुक्ल ने युवक कांग्रेस की कार्यविधि पर भी सवाल उठाए।

उन्होंने तर्क दिया कि चुनाव में युवावर्ग महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है लेकिन छत्तीसगढ़ के युकां पदाधिकारी केवल अपने नेताओं की चापलूसी में लगे हुए हैं। आम जनता के बीच उनकी छवि भी अच्छी नहीं है।

शुक्ल ने प्रभारी महासचिव सामी के कामकाज की सराहना भी की। साथ ही केन्द्र सरकार पर छाए संकट पर सोनिया से बातचीत की और अल्पमत की नरंिसंह राव सरकार के अनुभव भी बांटे। करीब आधे घंटे की इस मुलाकात में सोनिया ने उन्हे गंभीरता से सुना और अनुशासन संबंधी मामलों पर चिंता प्रकट करते हुए रोक लगाने का आश्वासन भी दिया।





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