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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur कोरबा.
लैंको पावर प्लांट में आज सुबह आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। घंटों प्रयास के बाद आग पर काबू पा लिया गया।
मंगलवार की सुबह 11 बजे सभी कर्मी लैंको के पावर प्लांट में अपने-अपने काम में जुटे थे कि उन्होंने स्टोर रूम से धुंआ निकलते देखा। वे कुछ समय पाते, इससे पहले धुंए का गुबार बड़ा हो गया। कर्मी स्टोर तक पहुंचे, तो पाया कि वहां आग लग गई है।
कंपनी की विभागीय फायर ब्रिगेड टीम को जानकारी दी गई, जिसने घटनास्थल पहुंचकर आग बुझाना शुरू किया। उधर सूचना पाकर नगर निगम कोरबा व बालको के फायर आफिसर वी.के. सिंह के नेतृत्व में फायर ब्रिगेड की टीम भी वहां पहुंच गई व तीनों ने आग पर काबू पाया। तब तक स्टोर में रखा सामान आग की चपेट में आ चुका था। बाद में स्टोर के पीछे वाली दीवार तोड़कर एक्सीवेटर की मदद से एक-एक कर सामान बाहर निकाला गया।
स्टोर में आग की लपटें तो नहीं उठीं, पर वहां रखे 10 कंप्यूटर, वाहनों के नए टायर, डीजल ऑयल, इलेक्ट्रिकल व इलेक्ट्रानिक्स के कीमती उपकरण, सिविल कार्यो में उपयोग में आने वाला सामान, टेबल-कुर्सी इसकी चपेट में आ गए।
आगजनी के संबंध में संभावना जताई जा रही है कि शार्ट सर्किट से स्टोर में आग लगी। यहां बड़ी मात्रा में डीजल ड्रम में स्टोर करके रखा हुआ था, इसलिए आग तेजी से फैली व स्टोर के सामानों को अपने संपर्क में ले लिया। आग बुझाने में सुरक्षा अधिकारी अरविंद शर्मा, राजमोहन की टीम ने मदद की। घटना की सूचना पर उरगा चौकी प्रभारी एस.एस. पटेल टीम के साथ पहुंच गए थे।
सुरक्षित निकाले 23 सिलेंडर
स्टोर में आक्सीजन के 23 सिलेंडर के साथ ऑयल भरे ड्रम भी रखे थे, जिन्हें फायर ब्रिगेड कर्मियों ने साहस के साथ बाहर निकाल लिया। यदि ये आग की चपेट में आते, तो विस्फोट होकर भयावह घटना हो सकती थी। मौके पर उपस्थित एजीएम स्टोर के.ओ रेड्डी ने पत्रकारों से कहा कि घटना की जांच कराई जाएगी। क्षति के संबंध में उनका कहना था कि सामानों का मिलान करने के बाद ही स्पष्ट आंकड़ा सामने आएगा।
अंतिम चरण में है निर्माण
लैंको अमरकंटक पावर प्रोजेक्ट हैदराबाद का यह पावर प्लांट चांपा-कोरबा सड़क मार्ग पर पताढ़ी के निकट निर्माणाधीन है। 300 मेगावाट की 2 इकाइयों का निर्माण अंतिम चरण में है। साथ ही द्वितीय चरण के तहत भी 300-300 मेगावाट की दो इकाइयां लगाने की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है। निर्माण कार्यो के लिए कीमती उपकरण पहले से मंगाकर रखे गए हैं। भारी सामान बाहर व छोटे सामान स्टोर में रखे जाते हैं। क्षति के बाद अब यह भी कहा जा रहा है कि सितंबर में प्रस्तावित विद्युत उत्पादन अब दिसंबर तक जाकर हो पाएगा।
क्षति 10 करोड़ की, बीमा भी उतना ही
जिस स्टोर में आग लगी, वह लैंको समूह की लैंको कंस्ट्रक्शन कंपनी का है। पावर प्लांट परिसर में ही टिन के शेड के रूप में यह अस्थायी स्टोर बनाया गया है। कंस्ट्रक्शन कंपनी के प्रोजेक्ट हेड वेंकटेश राव ने मोबाइल पर दैनिक भास्कर से चर्चा में कहा कि आग से करीब दस करोड़ की क्षति का अनुमान है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि दस करोड़ का ही बीमा भी है। जब उनसे बीमा व स्टोर में रखे सामान के विस्तृत ब्योरे व निकट भविष्य में होने वाले आडिट के बारे में पूछा गया, तब उन्होंने ओके थैंक्यू कहते हुए फोन काट दिया।
आडिट होना था
मिली जानकारी के अनुसार जल्द ही लैंको के मुख्यालय हैदराबाद से एक विशेष आडिट टीम यहां जांच-पड़ताल करने आने वाली है। जिस बीमा कंपनी से इंश्योरेंस कराया गया है, वह इफको टोकियो जनरल इंश्योरेंस कंपनी बताई गई है। अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इस निजी बीमा कंपनी के किस कार्यालय से यह बीमा किया गया था। इस बात को लेकर भी अटकलें लगती रही कि जब स्टोर्स के आसपास कर्मचारी थे व घटना सुबह हुई, फिर कर्मियों को आग का पता कैसे नहीं चला!