जयपुर.
सवा साल से बंद अल्बर्ट हॉल म्यूजियम के मंगलवार को खुलते ही इसे देखने के लिए पर्यटकों का हुजूम उमड़ पड़ा। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए म्यूजियम प्रशासन और सुरक्षाकर्मियों को धक्का-मुक्की करनी पड़ी। बाद में समझाइश के बाद पर्यटकों की एक साथ कई लंबी लाइनें लगानी पड़ीं। इससे पहले मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने दोपहर 12:30 बजे म्यूजियम का उद्घाटन किया। वे यहां डेढ़ घंटे रुकी और म्यूजियम डिस्प्ले को देखकर काफी सराहा।
पहले दिन मंगलवार को निशुल्क प्रवेश होने से सुबह से ही इसे देखने वालों की भीड़ उमड़ पड़ी, लेकिन पहले तो मुख्यमंत्री के नियत समय से लगभग एक घंटे देरी से आने और लगभग डेढ़ घंटे म्यूजियम देखने के दौरान पर्यटकों के प्रवेश पर रोक लगानी पड़ी। मुख्यमंत्री के रवाना होते ही रामनिवास बाग के चारों ओर खड़ी भीड़ ने म्यूजियम की ओर दौड़ लगा दी। शाम को म्यूजियम बंद होने तक इसे देखने के लिए पर्यटकों की लंबी लाइनें लगी रहीं।
खूबसूरत बिल्डिंग तो दिखेगी, लेकिन बच्चों की गर्दन दुखेगी : म्यूजियम डिस्प्ले के दौरान ध्यान रखा गया है कि पर्यटक पुरासामग्री के प्रदर्शन के साथ खूबसूरत बिल्डिंग के सभी हिस्सों को आसानी से निहार सकें। इसलिए म्यूजियम की दीवारों पर हुए ‘आराइश वर्क’ को दिखाने के चक्कर में डिस्प्ले 8 से 9 फुट ऊपर पहुंच गया है। इसे देखने में खासकर बच्चों की गर्दन दर्द कर सकती है। चूंकि म्यूजियोलॉजी के अनुसार म्यूजियम में डिस्प्ले ‘आई लेवल’ (व्यक्ति की औसत लंबाई के हिसाब से आंखों की सीध में) पर होना चाहिए। गौरतलब है कि 1887 में बनकर तैयार हुई म्यूजियम बिल्डिंग को इस खूबसूरती से बनाया गया था, जिसे देखना आश्चर्य में डालता था। अब तक बिल्डिंग का शानदार आराइश वर्क डिस्प्ले में ढका हुआ था।
कैमल गन सहित तुगलकी सिक्के भी देखें : म्यूजियम के संग्रह को चार चांद लगाने के लिए भरतपुर म्यूजियम से प्रसिद्ध ‘कैमल गन’ सहित दूसरे प्राचीन हथियार लाए गए हैं। अब म्यूजियम में इन्हें लगभग साल-छह महीने वहां की बतौर पहचान प्रदर्शित किया जाएगा। इसी तरह सिक्कों की गैलरी में पर्यटकों को मुगल सम्राट मो. बिन तुगलक की दुर्लभ सोने की मोहरें सहित लगभग 600 साल पुराने सिक्कों का संग्रह देखने को मिलेगा। इसके अलावा दुनियाभर में दुर्लभ कांच के सिक्के सहित मुगल, ब्रिटिश और विभिन्न राजपूत राजाओं की मुद्रा भी शामिल है।