कोटा. मरम्मत कार्य चलने के बावजूद चंबल की दरई मुख्य नहर में इस सप्ताह पानी छोड़ना पड़ेगा। वजह है नेशनल थर्मल पावर प्रोजेक्ट अंता(एनटीपीसी) को पानी मुहैया कराना।
करीब 50 हजार क्यूसेक पानी देने के लिए सीएडी ने 6 जुलाई से दरई मुख्य नहर में पानी छोड़ने का निर्णय ले लिया है। नहर सप्ताहभर तक चलेगी। पहले दिन 500 क्यूसेक पानी छोड़ा जाएगा। पांच-पांच घंटे के अंतराल में पानी की मात्रा बढ़ाई जाकर इसे 2500 क्यूसेक तक किया जाएगा।
स्टोरेज बढ़ाने पर भी समस्या
क्लोजर के समय नहर नहीं चलाना पड़े, इसलिए सीएडी प्रशासन ने एनटीपीसी अंता पर पानी के स्टोरेज के संसाधन विकसित करने का दबाव बनाया था, क्योंकि स्टोरेज के साधन सीमित होने से 40-40 दिन के अंतराल में नहर में पानी छोड़ना पड़ता था। खास तौर से नहर बंद रहने के समय पानी छोड़ना मुश्किल काम था। नतीजतन एनटीपीसी ने कुछ और टैंकों का निर्माण कराया तो अब 75 से 90 दिन के अंतराल में उसे पानी की जरूरत पड़ती है।
नहर चलाना नुकसानदेह
वर्तमान में जब दरई मुख्य नहर के मरम्मत कार्य चल रहे हैं तो नहर में पानी छोड़ने से कार्र्यो की गति बहुत कम हो जाएगी। नहर के अंदर के कार्य तो बंद करने पड़ेंगे, जबकि नहर की जर्जर हालत में सुधार के लिए मरम्मत कार्य पूरे कराना जरूरी है। फिर बारिश तेज होते ही काम बंद करना पड़ेगा। रबी में किसानों को पानी देने के लिए नहर चलाते ही मरम्मत कार्य नहीं हो सकते।
एनटीपीसी के लिए 6 जुलाई से पानी छोड़ा जाएगा। 50 हजार क्यूसेक पानी देना होगा। हालांकि एनटीपीसी ने पानी के स्टोरेज की मात्रा बढ़ाने के लिए टैंक बनवाए हैं, फिर भी नहर के क्लोजर के समय पानी छोड़ना पड़ेगा’।
—एसएस सिसोदिया, एक्सईएन, सीएडी