उदयपुर.
नगरवासियों को दर्शन देने के लिए भगवान् जगदीश तैयार हो चुके हैं। रथ सज-संवर रहा है, मखमली वागा तैयार है और श्रद्धालुओं ने कमर कस ली है। पुरी की ही तर्ज पर इस बार रथयात्रा में उड़ीसा मूल के वे निवासी भी पारंपरिक वेशभूषा में शामिल होंगे जो यहीं बसे हैं। अगली 4 जुलाई को निकलने वाली रथयात्रा में करीब दो सौ ओडीसी कलाकार मृदंग-ताल बजाते हुए चलेंगे।
मुख्य रथयात्रा शाम 4 बजे जगदीश चौक से शुरू होगी। इससे पूर्व अपराह्न् 3 बजे मूल परंपरानुसार पुराने छोटे काष्ठरथ में जगदीशजी मंदिर परिक्रमा करेंगे। परिक्रमा गणोश देवरी से शुरू होकर सूर्य देवरी, माताजी की देवरी और शिव देवरी होती हुई संपन्न होगी। इस बार मुख्य अतिथि पुष्टिमार्गीय वैष्णव संप्रदाय के गोस्वामी तिलकायत इंद्रदमन महाराज के पुत्र विशाल बावा होंगे। वे नाथद्वारा से दोपहर 2 बजे फतहपुरा चौराहा पहुंचेंगे। उनका स्वागत घनश्यामसिंह कृष्णावत और कैलाश मानव, अंतरराष्ट्रीय वैष्णव परिषद की स्थानीय शाखा के अध्यक्ष राजेश बी. मेहता, पुरुषोत्तम पानेरी, जयंती भाई पारिख, प्रभुलाल साहू आदि करेंगे। विशालजी को जुलूस के रूप में श्रीनाथजी के हवेली मंदिर ले जाया जाएगा। विशाल बावा 3.30 बजे जगदीश चौक पहुंचेंगे और रथ का रस्सा सबसे पहले खींचेंगे।
आज चौक में आएगा रथ
रथ समिति के प्रमुख गोपालसिंह पंवार ने बताया कि रथ की सफाई, रंग-रोगन और पॉलिश हो चुकी है। बुधवार शाम 7 बजे रथ जगदीश चौक में लाकर रखा जाएगा। चौक में रथ के पुर्जे लगाए जाएंगे। रथ में जगन्नाथराय, दाणीरायजी और महालक्ष्मी की चल प्रतिमाएं बिराजेंगी।
राजा-रानी जैसे सजेंगे जगदीश-लक्ष्मी
रथ समिति के अध्यक्ष प्रेमदास वैष्णव ने बताया कि भगवान जगन्नाथ और दाणीराय को मलमल का केसरिया वागा धारण कराया जाएगा। पोशाक शशिकला जीनगर ने तैयार की है। भगवान को पांच फैंटे, अंगरखी, पाजामा, पाग, एक वागा और चोली धारण करेंगे। लक्ष्मीजी को रूपेरी गोटा किनारी जड़ित साड़ी, कांचली और चरणा धारण कराया जाएगा।
मार्ग जहां से जगदीश गुजरेंगे
धर्मोत्सव समिति के प्रमुख दिनेश मकवाना ने बताया कि शाम 4 बजे रथयात्रा शुरू होकर घंटाघर, बड़ा बाजार, मोचीवाड़ा, भड़भूजा घाटी, तीज का चौक, धान मंडी, झीणी रेत का चौक, अस्थल मंदिर, आरएमवी रोड, कालाजी गोराजी, रंगनिवास, भटियानी चौहट्टा होकर जगदीश चौक पहुंचेगी। महाआरती के पश्चात रथयात्रा संपन्न होगी। महादेव सेना संगठन की ओर से यात्रा में महादेव की बारात शामिल होगी। रथ में जुतने वाले घोड़ों को अंकुरित चना-उड़द खिलाया जाएगा। भगवान जगन्नाथ को मिष्ठान के अलावा जामुन, दाड़म और अमरूद का भोग लगाया जएगा तथा कार्यकर्ता 1001 ओम पताकाएं लेकर चलेंगे।