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International International इस्लामाबाद. जासूसी के आरोप में दस साल पाकिस्तान की जेल में गुजारने वाले राम प्रकाश के लिए इससे बुरा शायद ही कुछ हो सकता था। मंगलवार को जब वह वाघा बॉर्डर पर पहुंचा तो भारतीय अधिकारियों ने वैध कागजों के अभाव में उसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया। नतीजा, राम प्रकाश को वापस जेल में डाल दिया गया। भारत ने इस मामले में सारा दोष पाकिस्तान के सिर मढ़ दिया है।
51 वर्षीय राम प्रकाश पुत्र दीवान चंद 1997 से लाहौर की कोट लखपत जेल में बंद था। उसे पाकिस्तान ने जासूसी के आरोप में पकड़ा था। दस साल की सजा पूरी हो जाने के बाद सोमवार को पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने उसकी रिहाई के आदेश जारी किए थे।
मंगलवार सुबह पाकिस्तानी अफसर राम प्रकाश को जेल से रिहा करवाकर वाघा बॉर्डर पर पहुंचे तो भारतीय अधिकारियों ने उसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इसके बाद पाकिस्तान ने राम प्रकाश को दोबारा कोट लखपत जेल भेज दिया। अटारी सीमा पर तैनात भारतीय आव्रजन अधिकारी के अनुसार रामप्रकाश को पहचान और भारत वापसी के लिए जरूरी कागजात नहीं होने के कारण वापस भेजा गया है।
पाकिस्तानी अधिकारियों से भी साफ शब्दों में कह दिया गया है कि समुचित कागजात के बगैर रामप्रकाश को भारतीय सीमा में दाखिल नहीं होने दिया जाएगा। इसके लिए इस्लामाबाद स्थित इंडियन एम्बेसी का प्रमाणपत्र भी जरूरी है। उधर पाकिस्तान स्थित इंडियन एम्बेसी ने एक बयान जारी कर कहा है कि पाक अधिकारी उनसे संपर्क किए बिना राम प्रकाश को सीधे अटारी ले गए थे।
शराब तस्करी करता था
रामप्रकाश ने एक पाकिस्तानी न्यूज चैनल से बातचीत में कहा कि उसे जून 1977 में गिरफ्तार किया गया था, जब वह पाक में शराब की तस्करी करके स्वदेश लौट रहा था। एक साल की पूछताछ के बाद उसे जेल में डाल दिया गया था।