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‘सिंह इज किंग’ शूट

अमृतसर.singh शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) द्वारा उठाए गए ऐतराज को दूर करने के लिए फिल्म निर्माता विपुल शाह इन दिनों अपनी नई फिल्म ‘सिंह इज किंग’ के कुछ दृश्यों में जरूरी बदलाव कर रहे हैं। मुंबई से फोन पर विपुल शाह ने बताया कि फिल्म को एसजीपीसी सदस्यों डॉ. गुरबचन सिंह बचन, कुलवंत सिंह, जसपाल सिंह, गुरिंदर सिंह बिट्टू और परमिंदर सिंह चढ़ोक को दिखाया गया था।

कमेटी ने जिन दृश्यों पर ऐतराज उठाया, उन्हें दोबारा शूट किया जा रहा है। फिल्म के अगस्त में रिलीज होने की उम्मीद है। उनका कहना था कि फिल्म में अक्षय कुमार ग्रामीण सिख युवक के रोल में हैं, जो ऑस्ट्रेलिया जाकर अपने गांव के लोगों को वापस लाकर उन्हें देश की मिट्टी और विरासत से जोड़ते हैं। अक्षय के अलावा कैटरीना कैफ, नेहा धूपिया और ओम पुरी अहम रोल में हैं। फिल्म का निर्देशन अनीस बजमी ने किया है।

आखिरी दृश्य में संपूर्ण सिख : मुंबई यूनिवर्सिटी में गुरु गोबिंद सिंह चेयर का कामकाज देख एसजीपीसी के पूर्व सचिव डॉ. गुरबचन सिंह बचन ने बताया कि फिल्म में सिख युवक के रोल में अक्षय कुमार की दाढ़ी और केश नहीं थे। अब आखिरी दृश्यों में वे संपूर्ण सिख के रूप में दिखेंगे।

गाने के बोल भी बदले: फिल्म के एक गाने का मुखड़ा ‘वाहे गुरु की मर्जी’ को बदल कर ‘अब दिल की मर्जी’ किया जा रहा है। डॉ. बचन ने बताया, चूंकि फिल्म सकारात्मक नजरिया पेश करती है, इसलिए कमेटी ने ऐतराज जताते हुए निर्माता की मजबूरी को भी सामने रखा है। विपुल शाह ने 100 रुपए के स्टांप पेपर पर लिखकर दिया है कि वे फिल्म को पूरा करने के बाद फिर पांच सदस्यीय कमेटी को दिखाएंगे और पूरी सहमति मिलने के बाद ही रिलीज करेंगे।

पहले भी मचा था शोर : मई 2005 में रिलीज हुई निर्देशक राहुल रवेल की फिल्म ‘जो बोले सो निहाल’ अपने नाम के कारण ही विवाद में फंस गई थी। इस फिल्म में सन्नी दयोल ने पंजाब पुलिस के सिख सिपाही का रोल किया था, जो एक हत्यारे की खोज में विदेश जाता है। इस फिल्म के विरोध में पंजाब के सिनेमाघरों के बाहर हिंसक प्रदर्शन हुए थे।

22 मई 2005 को दिल्ली के दो सिनेमाघरों में विस्फोट भी हुए थे, जिनमें एक दर्शक की मौत और कई घायल हुए थे। मजबूर होकर निर्माता को फिल्म का प्रदर्शन रोकना पड़ा था। कई साल पहले निर्माता, निर्देशक और अभिनेता दारा सिंह की फिल्म ‘सवा लाख से एक लड़ाऊं’ को इसलिए नहीं चलने दिया गया था क्योंकि इस फिल्म में कई ऐतिहासिक सिख चरित्रों को केश रहित अभिनेताओं ने निभाया था।





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