भोपाल. राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में निरीक्षण के लिए आई विवि अनुदान आयोग (यूजीसी) की कमेटी से जिला कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के पूर्व जिलाध्यक्ष कमरुद्दीन दाउदी के साथ कुछ शिकायतकर्ताओं ने मंगलवार को मुलाकात की। इन लोगों ने कमेटी से आरजीपीवी को अनुदान स्वीकृत न करने की मांग की है। यूजीसी की टीम तीन जुलाई तक विवि का निरीक्षण करेगी।
टीम की रिपोर्ट के आधार पर आरजीपीवी को यूजीसी अधिनियम की धारा 12 बी के तहत केंद्रीय अनुदान की पात्रता मिल सकेगी। इस कमेटी के अध्यक्ष उत्तर बंगाल विवि के कुलपति प्रो. अरुणाभा बासु मजूमदार हैं।
इनके साथ आईआईटी दिल्ली के प्रो. एके श्रीवास्तव, आईआईटी कानपुर के डॉ. वीके जैन, अलीगढ़ मुस्लिम विवि के प्रो. परवेज मुश्तजब और यूजीसी की संयुक्त सचिव डॉ. उर्मिला देवी भी शामिल हैं।
श्री कमरुद्दीन ने आरजीपीवी और कुलपति पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के बारे में भी कमेटी को जानकारी दी। शिकायतकर्ताओं ने कमेटी के सामने आशंका व्यक्त की है कि अगर उसकी अनुशंसा पर विवि को केंद्रीय अनुदान मिलने लगेगा तो यहां उससे विवि का विकास करने के बजाए भ्रष्टाचार के रास्ते निकाल लिए जाएंगे।
शिकायतकर्ताओं ने टीम से विवि का निरीक्षण न करने का अनुरोध किया। इस पर टीम के सदस्यों ने जांच से निरीक्षण का कोई संबंध न होने का कहकर इस अनुरोध को टाल दिया। कुलपति पीबी शर्मा ने सदस्यों के साथ चर्चा करने के लिए कॉलेज संचालकों को भी बुलाया है। मंगलवार को आयोजित रात्रिभोज में कॉलेज संचालकों ने टीम के सदस्यों से अधोसंरचना के विकास पर चर्चा की।
गौरतलब है कि आरजीपीवी वर्तमान में यूजीसी अधिनियम की धारा 2 एफ के तहत संचालित है। यूजीसी धारा 12 बी के तहत आने वाले संस्थानों को शैक्षणिक और शोध संरचना मजबूत करने और छात्र कल्याण के लिए केंद्रीय सहायता उपलब्ध कराती है। यह सदस्य होटल लेक व्यू अशोका में ठहरे हुए हैं। श्री कमरुद्दीन ने वहीं जाकर सदस्यों से चर्चा की और उन्हें आरजीपीवी में चल रही जांच कार्रवाई से अवगत कराया।