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रिजल्ट के बाद खुल रही हैं बीस हजार कापियां

भोपाल. हाईस्कूल में बारकोड प्रणाली मप्र माध्यमिक शिक्षा मंडल के गले की फांस बन गई है। बारकोड घिस जाने के कारण तीन जिलों के करीब पौने दो हजार विद्यार्थियों का रिजल्ट अटक गया है। माशिमं इन विद्यार्थियों की गणित की कापियों की पहचान नहीं कर पा रहा है। फलस्वरूप माशिमं को तीनों जिलों की 20 हजार कापियां फिर से खुलवानी पड़ रही हैं।

इस अव्यवस्था से भोपाल, इंदौर और देवास जिलों के विद्यार्थी प्रभावित हुए हैं। हाईस्कूल की कापियों पर बारकोड स्टीकर लगे होने के कारण पहले तो माशिमं को रिजल्ट घोषित करने में देरी हुई। बाद में 1760 विद्यार्थियों का रिजल्ट अटक गया।

सूत्रों के मुताबिक माशिमं ने नौ जून को हाईस्कूल का परीक्षा परिणाम जारी करने के बाद रुके हुए परिणामों की सुध ली, तो नई समस्या खड़ी हो गई। तीनों जिलों के करीब डेढ़ हजार विद्यार्थियों की गणित की कापियों की पहचान (ट्रेस) नहीं हुई।

इस कारण माशिमं को तीनों जिलों की 20 हजार कापियां फिर से खोलने का निर्णय लेना पड़ा। इन कापियों की गहन जांच चल रही है। कापियों की पहचान न होने के कारण मूल्यांकन नहीं हो पा रहा है और विद्यार्थियों का रिजल्ट जारी होने में देरी हो रही है।

उल्लेखनीय है कि प्रदेश के तीनों जिलों में इस वर्ष बारकोड प्रणाली से हाईस्कूल की परीक्षा प्रयोग के तौर पर आयोजित करवाई गई थी। भोपाल से करीब पांच हजार विद्यार्थी इस परीक्षा में शामिल हुए थे। माशिमं के सचिव डीडी अग्रवाल से संपर्क नहीं हो सका, जबकि अध्यक्ष सुधीर कुमार चतुर्वेदी ने मामले की जानकारी होने से इंकार कर दिया।

कैसे उलझा मामला
परीक्षा के दौरान विद्यार्थियों ने कापियों की पहचान के लिए रोल नंबर डालने के चक्कर में बारकोड पर ब्लेड और पिन से स्क्रेच कर दिए। जिस कारण कंप्यूटर कापियों पर छपे गोपनीय कोड का मिलान नहीं कर पा रहा है और विद्यार्थियों की कापियां ट्रेस नहीं हो पा रही हैं।

बारकोड प्रणाली लागू करते हुए तीनों जिलों के शिक्षकों के लिए माशिमं ने विशेष प्रशिक्षण आयोजित किया था। पहली बार प्रशिक्षण में न आने वाले शिक्षकों के लिए दोबारा प्रशिक्षण का आयोजन किया गया था।

क्या हो रही दिक्कत
जिन डेढ़ हजार विद्यार्थियों का परीक्षा परिणाम रोका गया है, उसमें से करीब सवा चार सौ विद्यार्थी भोपाल के हैं। रिजल्ट जारी न होने के कारण पहले तो छात्र परेशान हैं। साथ ही वे और उनका स्कूल यह तय नहीं कर पा रहा है कि उन्हें अब किस कक्षा में बैठना है।





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