इंदौर. सोसायटियों द्वारा प्लॉट आवंटन में की जा रही गड़बड़ियों पर लगाम कसने के लिए बुधवार को आयुक्त सहकारिता और इंदौर विकास प्राधिकरण के संचालक मंडल व अधिकारियों के बीच चर्चा होगी। इसमें इन गड़बड़ियों से निपटने पर चर्चा होगी। प्राधिकरण पर इस मामले को जल्द सुलझाने का जबर्दस्त दबाव है। इसी के चलते यह चर्चा महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
महात्मा गांधी सोसायटी में प्लॉट आवंटन को लेकर हुई अनियमितताओं का मामला उछलने के बाद इस बात ने जोर पकड़ा था कि आवंटन की कोई व्यवस्थित नीति नहीं है। इस अभाव का फायदा लेते हुए सोसायटियां सांठगांठ कर नए सदस्यों को प्लॉट आवंटित कर देती हैं। सांसद सुमित्रा महाजन तो इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान से भी कर चुकी हैं।
सोमवार को कलेक्टर राकेश श्रीवास्तव के सामने प्राधिकरण पदाधिकारियों ने जब यह मामला उठाया तब खुद कलेक्टर ने इसे गंभीरता से लिया था और इस पर जल्द ध्यान देने की बात कही थी। इसके तत्काल बाद मंगलवार को ही यह तय हो गया कि उपायुक्त सहकारिता अंबरीश वैद्य प्राधिकरण पदाधिकारियों से और अधिकारियों से इस मामले में चर्चा करें।
यह है समस्या की जड़
अब तक प्राधिकरण और सहकारिता विभाग, दोनों ही प्लॉट आवंटन मामले में पल्ला झाड़ने के सिवाय कुछ नहीं कर रहे थे। प्राधिकरण सोसायटियों की सूची सहकारिता विभाग द्वारा भेजने का तर्क देता है जबकि सहकारिता विभाग यह कहकर बच जाता है कि हम केवल सदस्यों का सत्यापन करते हैं, प्लॉट आवंटन की अनुशंसा नहीं। दोनों के तर्को से इस मामले में असल जिम्मेदारी तय नहीं हो पा रही है।
बहरहाल, प्राधिकरण के अधिकारी बुधवार को होने वाली बैठक में उन सोसायटियों का लेखा-जोखा रखेंगे जिनकी भूमिका पर शक की सूई घूम रही है। कलेक्टर की रुचि के चलते हो रही इस चर्चा से उम्मीद जागी है कि जल्द ही कार्यो और जिम्मेदारियों का बंटवारा भी तय हो जाएगा।