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कहीं मिले फूल तो कहीं झाड़ू-धूल

इंदौर. नए सत्र का पहला दिन, छुट्टियों के बाद मंगलवार सुबह बच्चे इसी आशा से स्कूलों में पहुंचे कि पूरा साल अच्छा बीते। कई स्कूलों में बाकायदा शिक्षक और प्राचार्य ने फूल देकर व माला पहनाकर स्वागत किया, सरस्वती पूजन हुआ, पौधे लगाए और किताबें भी मिली। वहीं कई स्कूलों में सालों से चली आ रही अव्यवस्था के तहत बच्चों को फूल तो नहीं, धूल जरूर मिली। कहीं शिक्षकों ने सफाई की तो कहीं बच्चों के हाथ में कलम की बजाय झाड़ू थमाई।

बच्चों व शिक्षिकाओं ने की सफाई
शहर के शिक्षकों के लिए ही बसी कॉलोनी सुदामा नगर के शासकीय अत्री देवी हाई स्कूल का समय था सुबह 7.30 बजे लेकिन 8.30 बजे तक 20 बच्चे शिक्षिकाओं के साथ जैसे-तैसे कूद-फांद करते पहुंचे थे।

गेट पर ताला लगा देख एक शिक्षिका ने कहा चाबी तो सपना मेडम के पास है। पूछने पर पता चला वे नहीं आई। इसके बाद एक शिक्षिका चाबी लेने उनके घर गई। स्कूल के सामने मैदान में बारिश से कीचड़ तो पीछे की ओर मोहल्लेभर की गंदगी और कूड़ा-करकट जमा था। इसे बच्चों ने झाड़ू लगाकर साफ किया।

प्राथमिक विद्यालय क्रं. 41 तो प्रधान पाठक की अनुपस्थिति में शिक्षिकाओं ने सफाई कि तब जाकर लग सका। उर्दू माध्यमिक, चंदननगर में सुबह एक भी छात्र नहीं था। यहां न तो 100 दिनी कार्ययोजना पर अमल मिला, न ही राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा दी गई राशि का उपयोग। ग्राम बांक और सिंदोड़ा में भी स्कूल समय पर नहीं खुले।

बच्चों का स्वागत, पौधे भी लगाए
-शहर के कई स्कूलों में पहले दिन न केवल विद्यार्थियों का स्वागत किया गया, बल्कि पौधारोपण और सरस्वती पूजन भी हुआ। नूतन हायर सेकंडरी, चिमनबाग में प्राचार्य दिनेश मालवीया की उपस्थिति में हुए कार्यक्रम में पहले दिन 150 विद्यार्थी शामिल हुए।

सामूहिक सरस्वती पूजन के बाद परिसर में छह पौधे लगाए गए। श्री मालवीया ने बताया टाइम-टेबल पहले से ही बना लिया था जिससे पढ़ाई शुरू करने में परेशानी नहीं हुई। हालांकि शुरू दिन ही 150 बच्चे अनुपस्थित रहे।

शासकीय उन्नत माध्यमिक विद्यालय, मालवीय नगर में प्रधान पाठक अरविंद बेहेरे की उपस्थिति में कक्षा शुरू हुई और राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा उपलब्ध करवाई गई किताबें दी गई। पहली शिफ्ट में यहां 5वीं से 8वीं तक के 200 में से 100 छात्र उपस्थित थे। शासकीय हाई स्कूल, भिचौली हप्सी में विधायक महेंद्र हार्डिया के आतिथ्य में उत्सव मना। यहां ब्लॉक अधिकारी आर.जी नरोलिया मौजूद थे।

कई किताबें ही नहीं मिलीं
छोटी खजरानी जनशिक्षा केंद्र में आने वाले 19 स्कूलों (चार माध्यमिक व 15 प्राथमिक) में आठ से अधिक प्रकार की किताबें नहीं पहुंची। ये हैं- पहली, दूसरी, 5वीं, 7वीं और 8वीं की हिंदी, छठवीं का पर्यावरण अध्ययन, छठवीं का विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, 7वीं का गणित, पर्यावरण अध्ययन और 8वीं का विज्ञान।

राज्य शिक्षा केंद्र के जिला समन्वयक डॉ. अवनीश दीक्षित ने बताया 12 तरह की पुस्तकें पाठ्य पुस्तक निगम से ही उपलब्ध नहीं हो पाई। इनमें कक्षा 1, 2, 5, 7, 8 की हिंदी, 6, 8 का विज्ञान, 6, 7 का सामाजिक विज्ञान, कक्षा 7 का गणित और 6, 7 का सहायक वाचन अभी तक उपलब्ध नहीं हो सका है।





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