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Madhya Pradesh
Gwalior Gwalior शिवपुरी. माधव राष्ट्रीय उद्यान में पिछले आठ माह से देखी जा रही मादा टाइगर गर्भवती हो सकती है, यह अनुमान माधव राष्ट्रीय उद्यान प्रशासन का है। क्योंकि यह मादा टाइगर पिछले एक माह से कम नजर आ रही है और ऐसा लगता है कि वह बच्चों को जन्म देने के लिए अज्ञातवास काट रही है।
गौरतलब है कि माधव नेशनल पार्क में आठ माह पूर्व बलारपुर क्षेत्र में ग्रामीणों को एक टाइगर नजर आया था। बाद में यह टाइगर पार्क में भीतर प्रवेश करता गया और समय-समय पर नेशनल पार्क की गश्ती दल को इसके द्वारा शिकार किए गए जानवरों के शव एवं पंजों के निशान मिलते गए।
पार्क के संचालक आलोक कुमार के अनुसार पंजों के निशान और शिकार किए गए जानवरों के शवों की जांच पड़ताल से यह बात साफ हो गई है कि टाइगर मादा है और वह संभवत: अशोकनगर के जंगल से भटककर शिवपुरी के माधवनेशनल पार्क में आ गई है।
पार्क के डायरेक्टर श्री कुमार का कहना है कि इस मादा को नेशनल पार्क में आए हुए महीनों हो चुके हैं और अब उसे कम लोग ही देख पा रहे हैं, वजह साफ है, हो सकता है कि वह गर्भवती है और बच्चों को जन्म देने के लिए इस जंगल में शरण पाए हुए है।
वन संरक्षक वन्य प्राणी ग्वालियर सीएच मुरलीकृष्णा का कहना है कि आमतौर पर मादा टाइगर गर्भवती होने के बाद अपने परंपरागत जंगल को छोड़ देती है और बच्चों को सुरक्षित जगह पर जन्म देने के लिए चली जाती है। बच्चों को जन्म देने से लेकर पालने तक की यह समय अवधि 8 से 10 माह हो सकती है। चूंकि माधव नेशनल पार्क में एक मादा टाइगर काफी समय से डेरा जमाए हुए है।
इससे ऐसा प्रतीत होता है कि वह गर्भवती है और संतान पैदा करने के लिए जंगल में छुपी हुई है। हालांकि इसकी अधिकृत पुष्टि होना बाकी है लेकिन यदि यह सही है कि माधव नेशनल पार्क के लिए इससे बड़ा तोहफा दूसरा कोई नहीं हो सकता। उम्मीद की जा रही है कि कुछ समय बाद यह मादा टाइगर अपने बच्चों के साथ जंगल में नजर आएगी।