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Madhya Pradesh
Gwalior Gwalior ग्वालियर. मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर खण्डपीठ के मुख्य न्यायाधीश एके पटनायक और न्यायमूर्ति एके गोहिल की युगलपीठ ने केंद्र और राज्य सरकार के साथ-साथ मीडिया द्वारा डकैतों के महिमामंडन पर आपत्ति जताते हुए इसे रोकने के निर्देश दिये हैं।
एक जनहित याचिका की सुनवाई के बाद दिए गए महत्वपूर्ण फैसले में उच्च न्यायालय ने कहा है कि सरकार या अन्य कोई भी अगर डकैतों को महिमा मंडित करता है तो उसके खिलाफ विधिक कार्यवाही की जाये। न्यायालय ने अपने फैसले में डकैतों और उनके द्वारा किये गये अपराधों के प्रति समाज में जागरुकता पैदा करने की बात भी कही है, ताकि देश की भावी पीढ़ी उनकी ओर प्रेरित न हो।
याचिका उपनगर ग्वालियर के चार शहर का नाका, शर्मा फार्म रोड निवासी विशनसिंह पुत्र रामप्रकाश सिंह बैस ने अपने अभिभाषक अवधेश सिंह भदौरिया और अवधेश सिंह तोमर के माध्यम से प्रस्तुत की थी।
क्या कहा गया था याचिका में
याचिका में कहा गया था कि ग्वालियर-चंबल संभाग में सरकार डकैतों का उनकी शर्तो के आधार पर समारोह पूर्वक आत्म समर्पण कराती है। इससे उनका महिला मंडन होता है। शासन और मीडिया का यह कृत्य समाज में डकैतों और अपराधियों को हतोत्साहित करने की जगह उन्हें प्रोत्साहित करता है। इसके फलस्वरूप जिन डकैतों, अपराधियों का स्थान काल कोठरी में होना चाहिए, उनमें से कई राजनीति के माध्यम से विधायिका के अंग तक बन जाते हैं।
जनहित याचिका उस समय प्रस्तुत की गई थी, जब मध्यप्रदेश में ईनामी दस्यु निर्भय गुर्जर के आत्म समर्पण की तैयारी चल रही थी। याचिकाकत्र्ता का कहना था कि डकैतों की शर्तो को मानकर सरकार जिस तरह से उनका आत्मसमर्पण कराती है, उससे डकैतों का नहीं प्रदेश शासन का ही आत्म समर्पण होता है।
याचिका में डकैतों को सरकार की ओर से दी जाने वाली सुविधाओं को विधि विरुद्ध बताते हुए कहा गया था कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया जंगल में जाकर जिस तरह से डकैतों की जीवन शैली के बारे में प्रसारण करता है, उसका युवा पीढ़ी पर गलत असर पड़ता है।
याचिकाकत्र्ता के अभिभाषक अवधेश भदौरिया ने न्यायालय के समक्ष तर्क प्रस्तुत किया कि जिन डकैतों के कारण समाज का ताना-बाना छिन्न-भिन्न होता है, यदि उनके महिमा मंडन और प्रोत्साहन को नहीं रोका गया तो समाज में व्याप्त अराजकता को नहीं रोका जा सकता।
श्री भदौरिया ने कहा कि डकैतों के खिलाफ समाज में एक धारणा बनाने के लिए शासन और मीडिया का सहयोग जरूरी है। न्यायालय ने उनके तर्को से सहमत होते हुए उक्त आदेश जारी किया।