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मंदिर के लिए पाक मुस्लिम का संकल्प

अमृतसर.पाकिस्तान हुक्मरानों ने तो मंदिर गिरवा दिया, लेकिन अब इसे बनवाने के लिए लड़ रहा है एक पाकिस्तानी मुसलमान। उसने प्रतिज्ञा ली है ‘जब तक मंदिर नहीं बन जाता, बाल नहीं बांधूंगा।’ यह शख्सियत है चौधरी रहमत अली गुज्जर, जिनके पिता भी बंटवारे के समय मंदिर और हिंदुस्तानियों को बचाने के ‘अपराध’ में जेल में डाल दिए गए थे और वहीं अत्याचार के कारण उनकी मौत हो गई थी।

लाहौर के रंगमहल की तंग गलियों से निकलकर छत्ता बाजार से होते हुए घनी आबादी वाले मोहल्ला वच्छूवाली में स्थित 325 साल पुराना मंदिर बाबा माहर दास 9 मार्च 2006 को हिंदुओं की संपत्ति के रखरखाव के लिए बने सरकारी विस्थापक ट्रस्ट संपत्ति (इवैक्यू ट्रस्ट प्रापर्टी) बोर्ड की मिलीभगत से गिरा दिया गया था। 28 मई 2006 को डॉन अखबार में खबर छपी कि व्यापारिक स्थल बनाने के लिए मंदिर गिरा दिया गया। वच्छूवाली कभी अमीर हिंदुओं का इलाका था। हिदुओं की बस्ती इसरा के बाद ये ऐसा इलाका था जहां 17-18 मंदिर और शिवाला मौजूद थे।

सात मंदिरों की अलग ऐतिहासिक पृष्ठभूमि थी। इनमें 1680 में बने मंदिर बाबा माहर दास का विशेष महत्व था। इसके प्रवेश द्वार पर हनुमान जी की मूर्ति थी। अंदर राधा-कृष्ण और राम दरबार की मूर्तियां थीं, जो हमेशा कीमती आभूषणों से सुसज्जित रहतीं थीं।

पाकिस्तान के मंदिरों पर रिसर्च के लिए पांचवीं बार पाकिस्तान गए इतिहासकार सुरेन्द्र कोछड़ से बातचीत में चौधरी ने कहा ‘मंदिर बनवाने में आप साथ दें। इस इलाके में जान से प्यारा मंदिर था। कुछ लोगों ने उसे गिरा दिया, मैं फिर से उसे खड़ा करना चाहता हूं। हमारे घर और हवेली पर मां साहिब (मां शेरां वाली) का पहरा है। मां शेरावाली, भगवान कृष्ण और गुरुनानक देव जी हमारे सांझा पैगंबर हैं।’

बाबरी मस्जिद विवाद के दौरान लाहौर के काफी मंदिर तोड़ दिए गए। बाबा माहर दास मंदिर को गिराने पहुंचे दंगाइयों को चौधरी और उनके साथियों ने फायरिंग कर खदेड़ दिया था।

हमलावरों ने बाद में उनके11 साथियांे का कत्ल कर दिया। इस बीच बिल्डर ख्वाजा सुहैल नसीम ने बीटीपीबी से मिलीभगत कर मंदिर वाली जगह पर पांच मंजिली प्लाजा बनाने की योजना बना ली। एक रात ख्वाजा सुहैल अपने पुत्रों और खुफिया एजे¨सयों और सेना के अधिकारियों को लेकर चौधरी की हवेली में आ धमका और सेना की पहरेदारी में मंदिर को गिरा दिया गया।





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