bhaskar Web English
HomeNewsNational National

पुनर्जन्म हुआ तो एम्स में करूंगा काम

नई दिल्ली. अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक डॉ. पी. वेणुगोपाल, केंद्रीय स्वास्थ्यमंत्री डॉ. अंबुमणि रामदास से लंबी कानूनी लड़ाई के बाद गत 8 मई को पद पर बहाल होकर अंतत: बुधवार को रिटायर हो गए। उन्होंने कहा कि यदि उनका पुनर्जन्म हुआ तो वे फिर एम्स में काम करना चाहेंगे।

इस बीच, दिल्ली हाईकोर्ट ने डॉ. वेणुगोपाल को छह माह का सेवाविस्तार दिए जाने की मांग संबंधी याचिका खारिज कर दी है। डॉ. टीडी डोगरा ने कार्यवाहक निदेशक का पद संभाल लिया है और एम्स ने निदेशक पद पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी कर 10 जुलाई तक आवेदन मांगे हैं।

डॉ. वेणुगोपाल को राजग कार्यकाल के दौरान 3 जुलाई 2003 को एम्स का निदेशक नियुक्त किया गया था। यूपीए के स्वास्थ्यमंत्री डॉ. रामदास की कार्यप्रणाली का उन्होंने कड़ा विरोध किया। रामदास ने भी उनके खिलाफ कड़े कदम उठाए। संस्थान में आरक्षण के मुद्दे पर 2006 से केंद्रीय स्वास्थ्यमंत्री से खुली लड़ाई, संसद द्वारा पारित नियम से हटाए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट द्वारा बहाल किए गए डॉ. वेणुगोपाल (66) ने कहा, ‘संस्थान को मैंने अपने जीवन के 49 साल दिए हैं और मुझे अपने किसी कार्य पर अफसोस नहीं है।’

भावी योजना पर डॉ. वेणुगोपाल ने कहा कि वे अब गरीबों और मानवता की सेवा करेंगे।

हाईकोर्ट का इनकार :

इस बीच, दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को एक मरीज की मां का आग्रह ठुकराते हुए डॉ. वेणुगोपाल का कार्यकाल बढ़ाने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने याचिकाकर्ता की खिंचाई करते हुए कहा कि अगर उसे अपने बेटे के इलाज की इतनी ही फिक्र थी तो वह पहले कोर्ट की शरण में क्यों नहीं आई। जस्टिस जीएस सिस्तानी ने कहा, पहले का ऐसा कोई उदाहरण नहीं है कि एक मरीज की अर्जी पर संस्थान के निदेशक का कार्यकाल बढ़ा दिया जाए।

डॉ. वेणुगोपाल और भी हजारों लोगों का इलाज कर रहे थे। याचिकाकर्ता मीना शर्मा की दलील थी कि उसके नौ साल के बेटे का डॉ. वेणुगोपाल इलाज कर रहे थे। उसके हृदय का जनवरी में वाल्व बदला जाना था लेकिन डॉ. वेणुगोपाल की बर्खास्तगी के कारण वह नहीं हो सका।





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: